रायबरेली में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की जनसभा का हाल। चार घंटे की देरी और बारिश के बावजूद मैदान में डटी रही भीड़। जानिए अखिलेश यादव ने बीजेपी पर कैसे साधा निशाना।

रविशंकर सिंह, रायबरेली।

उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की जनसभा में भारी उत्साह देखने को मिला। हालांकि, निर्धारित समय से चार घंटे की देरी से पहुंचने के बावजूद बारिश और प्रतिकूल मौसम के बीच जनता और कार्यकर्ता मैदान में डटे रहे। इस दौरान सपा मुखिया ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आते ही राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं, जबकि समाज में आपसी एकरूपता और बिना किसी भेदभाव के विकास सबसे जरूरी है।

  सपा मुखिया अखिलेश यादव के आने का आधिकारिक कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे का तय था, लेकिन व्यस्तताओं या अन्य कारणों से वे करीब चार घंटे विलंब से शाम लगभग 5:30 बजे जनसभा स्थल पर पहुंचे। इस दौरान मौसम खराब होने और बारिश के कारण लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। स्कूली बच्चों और आम नागरिकों ने बारिश से बचने के लिए कुर्सियों और तख्तियों का सहारा लिया। इसके बावजूद, सपा मुखिया के आने तक जनता मैदान छोड़कर नहीं गई और वे उनका इंतजार करते रहे। अखिलेश यादव ने करीब पौन घंटे तक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित किया।

  जनसभा को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा समाज में ध्रुवीकरण करने वाले मुद्दों को उठाने लगती है। उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी जरूरत समाज में एकरूपता और आपसी सौहार्द की है, जहां किसी के साथ भी किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। अपने चिर-परिचित अंदाज में सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, हम नहीं आने वाले हैं।

इस आयोजन ने एक बार फिर रायबरेली के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है, जहां कार्यकर्ताओं का जोश और नेताओं के तीखे तेवर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कांग्रेस पार्टी से गठबंधन का संकेत दे गए अखिलेश

 सपा प्रमुख अखिलेश यादव का दौरा कई मायने में अलग रहा। समर्थकों की ऐसी भीड़ रही जो इससे पहले कभी नहीं दिखी। सबसे खास बात यह रही कि अखिलेश ने मंच से कांग्रेस से गठबंधन के साफ संकेत दे दिए। उन्होंने कांग्रेस का नाम नहीं लिया लेकिन इशारों में अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया। सपा प्रमुख ने गठबंधन के मुद्दे पर मंच से ही कहा कि विधानसभा चुनाव हम जीतने जा रहे हैं। पहली बार उन्होंने किसी सभा में ‘हम’ शब्द का प्रयोग किया।

इसी से संकेत मिल गया कि कांग्रेस और सपा का गठबंधन होगा। कहा कि हम सामाजिक न्याय की स्थापना चाहते हैं। इस कारण गठबंधन होगा, हम साथ चलेंगे। गठबंधन में बात सीट की नहीं, जीत की होगी।

असल में नौ सितंबर को जब राहुल गांधी दिशा की बैठक में भाग लेने आए थे तो सपा के कई प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की थी। इससे साफ होने लगा था कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा की केमिस्ट्री मेल खाने वाली है। समान नागरिक संहिता के मुद्दे को भी अखिलेश ने मंच से उठाया। कहा कि संविधान की रक्षा के लिए धर्म को मुद्दा बनाती है, लेकिन लोग अब इनके झांसे में नहीं आने वाले हैं।

चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना

चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यदि वोटों की डकैती न हुई होती तो वर्ष 2022 में सपा की सरकार बन गई होती। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का पूरा भेद खुल गया है। वह कठपुतली बनकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में इतना घटिया काम कभी नहीं हुआ, जितना चुनाव आयोग ने किया है। महंगाई को लेकर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा को वोट नहीं मिलेगा। आरोप लगाया कि पेट्रोल में मिलावट शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि तीन प्रतिशत मिलावट न हो तो पेट्रोल कितना महंगा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार नौकरी नहीं दे सकी, खाद नहीं दे सकी और पेपर लीक करा दिया। प्रदेश में सबसे अधिक पेपर लीक हुए हैं।

चुनाव आते ही भाजपा इस मुद्दे को उठाने लगी है जबकि जरूरी है कि समाज में एकरूपता हो। किसी के साथ कोई भेदभाव न हो। उन्होंने कहा कि हम नहीं आने वाले हैं। 

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