पटना। बिहार की राजधानी पटना में शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखाने वाले एक पुलिसकर्मी का मामला सामने आया है, जहां ड्यूटी पर तैनात या सार्वजनिक स्थान पर एक पुलिसकर्मी शराब के नशे में धुत मिला। विभाग की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए जब उक्त पुलिसकर्मी की मेडिकल जांच कराई गई, तो उसमें शराब पीने की आधिकारिक पुष्टि हो गई। इसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ मामला (FIR) दर्ज कर लिया गया है।


जानकारी के अनुसार पटना के रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के खेमनीचक इलाके में गश्त या रूटीन चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी संदिग्ध अवस्था में पाया गया। पुलिसकर्मी की पहचान विनोद राम के रूप में हुई। उसकी हरकतों और बातचीत के तरीके से स्पष्ट रूप से लग रहा था कि वह भारी नशे में है।

पुलिस टीम उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गई। वहां डॉक्टरों द्वारा की गई मेडिकल जांच (ब्लड टेस्ट/ब्रेथ एनालाइजर) में अल्कोहल (शराब) के सेवन की पुष्टि पाई गई।

मेडिकल रिपोर्ट में शराब पीने का प्रमाण मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके साथ ही उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।


बिहार में शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों, विशेषकर पुलिसकर्मियों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर कानून अब और सख्त और स्पष्ट हो गया है। हाल ही में पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है:

अदालत ने स्पष्ट किया है कि विभागीय कार्रवाई या बर्खास्तगी के लिए सिर्फ 'ब्रेथ एनालाइजर' (फूंक मारने वाली मशीन) की रिपोर्ट को ही अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। आरोपी का दोष पूरी तरह सिद्ध करने के लिए अस्पताल में ब्लड टेस्ट (खून की जांच) कराना बेहद जरूरी है।