विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग पर विधानसभा सचिवालय ने नोटिस जारी कर 7 दिनों में जवाब मांगा है। जानें पूरा मामला और जदयू के आरोप
पटना। मोकामा से विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर कानूनी और राजनीतिक संकट गहराने लगा है। बिहार विधानसभा सचिवालय ने अनंत सिंह को एक औपचारिक 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है, जिसमें उनसे एक सप्ताह (7 दिनों) के भीतर जवाब देने को कहा गया है। सचिवालय ने विधायक से स्पष्टीकरण मांगा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के मद्देनजर भारतीय संविधान के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता क्यों न समाप्त कर दी जाए।
यह कार्रवाई बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के निर्देश पर की गई है। विधानसभा के सचिव संजय कुमार सिंह ने जनता दल (यूनाइटेड) की आधिकारिक शिकायत के आधार पर यह नोटिस जारी किया है।
उल्लेखनीय है कि जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष के पास शिकायत दर्ज कराते हुए अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।
जदयू द्वारा दायर शिकायत के अनुसार, अनंत सिंह पर हालिया चुनावों के दौरान पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ काम करने और खुले तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप है।
पार्टी नेतृत्व ने इसे घोर अनुशासनहीनता माना। इस मामले में कार्रवाई करते हुए जदयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी (पूर्व विधायक) नीलम सिंह को पहले ही 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद जदयू ने संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के प्रावधानों के तहत अनंत सिंह की विधायकी समाप्त करने का औपचारिक अनुरोध विधानसभा अध्यक्ष से किया।
संविधान और विधानसभा के नियमों के तहत अनंत सिंह को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया है। निर्धारित एक सप्ताह की समय-सीमा के भीतर अनंत सिंह को इस कारण बताओ नोटिस का लिखित जवाब विधानसभा सचिवालय में जमा करना होगा। अनंत सिंह द्वारा सौंपे गए जवाब और जदयू द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का निष्पक्ष अध्ययन करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में आगे का अंतिम निर्णय लेंगे।
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