नजीबाबाद स्थित ऐतिहासिक स्वयंभू मोटा महादेव मंदिर में लाखों कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की कांवड़ यात्रा इस मंदिर में जल चढ़ाने के बाद ही पूरी मानी जाती है।

 

  • नजीबाबाद स्थित ऐतिहासिक स्वयंभू मंदिर में जलाभिषेक के साथ पूरी होती है हरिद्वार से शुरू हुई कांवड़ यात्रा
  • साहनपुर रियासतकालीन मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़, नन्हे-मुन्ने और महिला श्रद्धालु भी शामिल

 

नीरज शर्मा, नई दिल्ली।

 ऐतिहासिक मालन नदी के तट पर बसे नजीबाबाद (बिजनौर) से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित स्वयंभू मोटा महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और कांवड़ यात्रा के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों शिवभक्त कांवड़िए नजीबाबाद की गलियों और चौबारों को 'बम-बम भोले' के जयकारों से गुंजायमान करते हुए मोटा महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर रहे हैं।

 

मान्यता है कि हरिद्वार से जल उठाकर लाने वाले श्रद्धालुओं की कांवड़ यात्रा मोटा महादेव मंदिर में पहली शीशी का गंगाजल अर्पित किए बिना अधूरी मानी जाती है। गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, बरेली, मुरादाबाद और काशीपुर समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कांवड़िए यहां शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ही अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ते हैं।

 

मंदिर के महंत शशिनाथ के अनुसार, यह शिवलिंग प्राचीनकाल में स्वयं भू-गर्भ से प्रकट हुआ था। कालांतर में 1780 में साहनपुर रियासत के राजा चतर सिंह ने इस ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मंदिर परिसर में स्थापित भैरव बाबा के दर्शन और आशीर्वाद से श्रद्धालुओं के कष्ट व सफर की थकान दूर होने की गहरी आस्था है।

 

मंदिर में जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में न केवल पुरुष, बल्कि महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी उत्साहपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। पूरे क्षेत्र में शिवभक्ति का माहौल बना हुआ है।

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