झारखंड की प्रवाह संस्था को जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के कार्यों के लिए दिल्ली में प्रतिष्ठित जल प्रहरी पुरस्कार मिला। संस्था अब तक 19,21,600 वॉटर क्रेडिट सृजित कर चुकी है।

कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।

जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जल सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए झारखंड स्थित देवघर की प्रवाह संस्था (PRAVAH) को प्रतिष्ठित ‘जल प्रहरी सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली स्थित विश्व युवक केंद्र में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को आयोजित सातवें जल प्रहरी सम्मान समारोह में संस्था की ओर से अंकित कुमार ने पुरस्कार ग्रहण किया। देशभर के 31 जल संरक्षकों को सम्मानित करने वाले इस समारोह में प्रवाह की उपलब्धि ने झारखंड में जल संरक्षण के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

समारोह में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी, भाजपा सांसद अरुण सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण गतिविधि प्रमुख गोपाल आर्य, प्रसिद्ध जल संरक्षण कार्यकर्ता एवं ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ राजेंद्र सिंह तथा उमा शंकर पांडे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पर्यावरणविदों, जल विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

जल संरक्षण के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान देने की पहल

जल प्रहरी निर्णायक मंडल के अध्यक्ष भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई हैं, जबकि अनिल सिंह इस सम्मान के संयोजक हैं। जल प्रहरी के संयोजक अनिल सिंह के अनुसार, इस सम्मान का उद्देश्य देशभर में जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, नदियों और तालाबों के संरक्षण तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल सुरक्षा के लिए काम कर रहे व्यक्तियों और संस्थाओं के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

आयोजन समिति के सदस्य अमन वशिष्ठ ने बताया कि इस सम्मान के माध्यम से अब तक आईएएस, आईपीएस और आरएएस अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों, किसानों तथा जमीनी स्तर पर जल संरक्षण के लिए काम करने वाले अनेक लोगों के प्रयासों को सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने जल संरक्षण के अभियानों को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया।

19,21,600 वॉटर क्रेडिट सृजित करने की उपलब्धि

प्रवाह संस्था को यह सम्मान ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के बीच जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण तथा जल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के लिए मिला है। संस्था के अनुसार, अब तक उसके प्रयासों से कुल 19,21,600 वॉटर क्रेडिट सृजित किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि जल संसाधनों के संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जल संकट से निपटने की दिशा में संस्था के कार्यों को दर्शाती है।

तालाब निर्माण से भूजल पुनर्भरण तक कई पहल

जल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए प्रवाह संस्था विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। इसके तहत खेतों में तालाबों का निर्माण, चेक डैम, लूज बोल्डर स्ट्रक्चर, ड्रम चेक डैम और मशीनरी चेक डैम जैसी जल संरक्षण संरचनाओं का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा स्प्रिंगशेड प्रबंधन और भूजल पुनर्भरण के उपायों के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

इन पहलों का उद्देश्य वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन करना, भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को मजबूत करना है। जल संरक्षण की इन व्यवस्थाओं से कृषि कार्यों को सहारा देने, ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और जल संकट के प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण खेती, पशुपालन और दैनिक जरूरतों की पूर्ति से सीधे जुड़ा हुआ है।

सामुदायिक सहभागिता को दिया श्रेय

प्रवाह संस्था ने इस सम्मान को अपने साथ-साथ उन सभी समुदायों और सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों का सम्मान बताया है, जिन्होंने जल संरक्षण की इस यात्रा में योगदान दिया है। संस्था के अनुसार, किसानों, महिला समूहों, क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं, सहयोगी संस्थाओं, दानदाताओं और अन्य समर्थकों की भागीदारी ने इन प्रयासों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संस्था का मानना है कि जल संरक्षण केवल तालाबों, चेक डैम और अन्य जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सुरक्षित करना, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की सामुदायिक क्षमता को मजबूत करना भी है। जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

जल सुरक्षा के लिए आगे भी जारी रहेगा अभियान

‘जल प्रहरी सम्मान-2026’ मिलने से प्रवाह संस्था के जल संरक्षण अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह सम्मान संस्था के लिए भविष्य में और अधिक प्रभावी ढंग से काम करने की प्रेरणा भी है। 19,21,600 वॉटर क्रेडिट सृजित करने की उपलब्धि के साथ संस्था ने सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल सुरक्षा की दिशा में अपने प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

जल संकट और बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रवाह संस्था के प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के संरक्षण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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