जमशेदपुर। लगातार हो रही बारिश के बीच मानगो के डिमना रोड पर एनएच-33 फ्लाईओवर निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी के कटाव से सड़क पर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई। ट्रांसपोर्ट नगर जाने वाली सड़क पर भारी मात्रा में मिट्टी और कीचड़ फैल जाने से सड़क बेहद फिसलन भरी हो गई, जिससे कई बाइक और कारें दुर्घटनाग्रस्त हो गईं। देखते ही देखते सड़क पर लंबा जाम लग गया और लोगों को घंटों परेशानियों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने मामले की जानकारी जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय को दी। सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त एवं संबंधित उच्चाधिकारियों से फोन पर बात कर स्थिति से अवगत कराया और तत्काल राहत एवं सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताते हुए निर्माण एजेंसी की लापरवाही पर सवाल उठाए।
विधायक ने अपने जनसुविधा प्रतिनिधि पप्पू सिंह को तत्काल घटनास्थल पर भेजा। उनके निर्देश पर पप्पू सिंह ने अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर रात में ही राहत कार्य शुरू कराया। भाजपा उलीडीह मंडल अध्यक्ष रबींद्र सिंह सिसोदिया भी मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर राहत कार्य में सहयोग किया। विधायक के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हुईं तथा सड़क से मिट्टी हटाने और आवागमन को सुरक्षित बनाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में एनएच-33 फ्लाईओवर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान बरसात को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, जिसके कारण आम लोगों की जान जोखिम में पड़ गई।
सरयू राय ने क्या कहा
विधायक सरयू राय ने कहा, "एनएच-33 पर बन रहे उपरि पथ की जमा मिट्टी बारिश में बहकर डिमना रोड पर फैल गई, जिससे सड़क पर फिसलन पैदा हो गई। वाहन फिसलने से कई लोग दुर्घटनाग्रस्त हुए। विरोध में लोग रात करीब 11 बजे सड़क पर उतर आए और जाम लगा दिया। मैंने तत्काल उच्चाधिकारियों से वार्ता की तथा अपने प्रतिनिधि पप्पू सिंह को मौके पर भेजा। लोगों का विरोध पूरी तरह जायज है। निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।"
मेयर की भूमिका पर भी उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने मानगो की मेयर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय मौजूदगी अपेक्षित थी। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि जनसमस्याओं के समाधान की बजाय केवल औपचारिक मौजूदगी और प्रचार पर अधिक ध्यान दिया जाता है। हालांकि, इस संबंध में मेयर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बारिश के बीच उत्पन्न इस स्थिति ने एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, एजेंसियों की जवाबदेही और आपदा जैसी परिस्थितियों में त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता पर बहस तेज कर दी है।