नॉटिंघम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रोटीन जेल विकसित किया है जो दांतों के नष्ट हो चुके इनेमल को प्राकृतिक रूप से दोबारा उगा सकता है। जानिए कैसे यह बिना दर्दनाक फिलिंग और ड्रिलिंग के दांतों की सड़न और सेंसिटिविटी से राहत दिलाएगा।
नई दिल्ली। खराब खान-पान, भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव के बीच दांतों की समस्याएं आम होती जा रही हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 20 से 45 फीसदी वयस्कों के दांतों में इनेमल (Enamel) के घिसने की समस्या देखी जाती है। इसी समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। नॉटिंघम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा 'प्रोटीन वाला' जेल तैयार किया है, जो दांतों की नष्ट हो चुकी ऊपरी परत यानी इनेमल को प्राकृतिक रूप से दोबारा उगाने और सड़न को रोकने में पूरी तरह मददगार साबित हो सकता है।
क्या है दांतों का इनेमल और यह क्यों जरूरी है?
इनेमल हमारे शरीर और दांतों की सबसे कठोर और पारदर्शी सुरक्षा परत होती है। यह दांतों के अंदरूनी हिस्सों को भोजन चबाने के दबाव, एसिड, बैक्टीरिया और ठंडे-गर्म खाद्य पदार्थों के प्रभाव से बचाती है। इनेमल में कोई जीवित कोशिकाएं नहीं होती हैं। एक बार एसिडिक भोजन, मसूड़ों की समस्याओं या तनाव के कारण दांत पीसने से यदि इनेमल घिस जाए या नष्ट हो जाए, तो हमारा शरीर इसे खुद से दोबारा नहीं बना सकता। अब तक इसके लिए डॉक्टर फिलिंग, क्राउन या फ्लोराइड ट्रीटमेंट का सहारा लेते थे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब इस विशेष जेल को क्षतिग्रस्त दांत पर लगाया जाता है, तो यह दांत पर एक बेहद पतली सुरक्षा परत बना लेता है। यह परत हमारी लार में मौजूद प्राकृतिक कैल्शियम और फॉस्फेट मिनरल्स को एक व्यवस्थित क्रम में नए क्रिस्टल बनाने में मदद करती है।
इस पूरी अद्भुत प्रक्रिया को 'एपिटैक्सियल नरलाइजेशन' (Epitaxial Mineralization) कहा जाता है।
इसके जरिए नए बनने वाले क्रिस्टल ठीक उसी पैटर्न में उगते हैं, जैसे प्राकृतिक रूप से स्वस्थ दांतों के इनेमल के क्रिस्टल होते हैं।
वैज्ञानिकों ने इस जेल का परीक्षण लैबोरेट्री में एसिड से खराब हुए दांतों के नमूनों पर किया। परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे कि यहां तक कि दो हफ्ते तक इंसानी लार के बीच रखे जाने पर भी जेल ने हूबहू प्राकृतिक इनेमल जैसी खनिज परत का निर्माण कर दिखाया।
यह जेल ठंडे-गर्म से होने वाली दांतों की झनझनाहट (Sensitivity) को कम करने में बेहद असरदार है। इनेमल की परत दोबारा बन जाने से दांत बैक्टीरिया के हमलों और कैविटी से सुरक्षित हो जाते हैं। भविष्य में यह तकनीक डेंटिस्ट की कुर्सी पर होने वाली दर्दनाक ड्रिलिंग और फिलिंग से मरीजों को राहत दिलाएगी।
इंडियन डेंटल एसोसिएशन (IDA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की तस्वीर काफी चिंताजनक है। देश की लगभग 85 से 90 फीसदी आबादी दांतों या मसूड़ों की किसी न किसी समस्या से जूझ रही है। इनमें से 95 फीसदी लोग मसूड़ों की बीमारी (Gum Disease) और 50 फीसदी से अधिक लोग कैविटी से प्रभावित हैं। जागरूकता की भारी कमी के कारण 10 फीसदी से भी कम लोग नियमित रूप से डेंटिस्ट के पास रूटीन चेकअप या इलाज के लिए जाते हैं।
यह जादुई जेल दंत चिकित्सा (Dentistry) की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है। शुरुआती अवस्था में ही दांतों की सड़न को रोकने और बिना किसी दर्द के दांतों को फिर से मजबूत व स्वस्थ बनाने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा।
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