चंदन ठाकुर ने डीडीसी को सौंपा साक्ष्य सहित आवेदन, तालाबों के भौतिक सत्यापन और मछली के जीरा वितरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग; जांच पूरी होने तक भुगतान रोकने का मिला आश्वासन
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।
देवघर जिले के पुनासी जलाशय और शिकटिया बैराज में संचालित फिंगरलिंग स्टॉकिंग योजना के तहत मछली के जीरा वितरण में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। योजना के लाभार्थियों के चयन से लेकर मछली के जीरा की निर्धारित मात्रा के वितरण तक में गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में करौं प्रखंड की बघनाडीह पंचायत निवासी चंदन ठाकुर ने 6 नवंबर 2026 को उप विकास आयुक्त (डीडीसी), देवघर को साक्ष्यों के साथ विस्तृत शिकायत सौंपी है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के बाद उप विकास आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, डीडीसी ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित योजना के तहत किसी प्रकार की राशि का भुगतान किया जाएगा।
लाभार्थियों के चयन में मनमानी का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिंगरलिंग स्टॉकिंग योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार लाभार्थियों के चयन से पहले संबंधित तालाबों का भौतिक सत्यापन और जीपीएस लोकेशन के साथ तस्वीर लेना जरूरी है। इसके बावजूद मत्स्य प्रसार पदाधिकारी रविंद्र नाथ सहाय और जिला मत्स्य पदाधिकारी पर बिना समुचित भौतिक सत्यापन के लाभार्थियों का चयन करने का आरोप लगाया गया है।
आवेदन में दावा किया गया है कि ऐसे लोगों को भी योजना का लाभ देने के लिए चयनित कर लिया गया, जिनके पास अपना तालाब उपलब्ध नहीं है। वहीं, वास्तविक तालाबधारक और योग्य किसान योजना के लाभ से वंचित रह गए। शिकायतकर्ता ने लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया, संबंधित तालाबों की वास्तविक स्थिति और जीपीएस आधारित सत्यापन की जांच कराने की मांग की है।
पांच क्विंटल की जगह 50 किलो जीरा देने का आरोप
मछली के जीरा वितरण में कथित गड़बड़ी को लेकर शिकायत में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। चंदन ठाकुर के आवेदन के अनुसार, योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को पांच क्विंटल यानी 500 किलोग्राम फिंगरलिंग उपलब्ध कराया जाना था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि निर्धारित मात्रा के अनुरूप वितरण और माप-तौल की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तथा कुछ किसानों को कथित तौर पर मात्र 50 किलोग्राम फिंगरलिंग ही उपलब्ध कराया गया।
आवेदन में यह भी सवाल उठाया गया है कि वितरण के दौरान मछली के जीरा की वास्तविक संख्या, वजन और स्टॉक का समुचित मिलान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि निर्धारित मात्रा और वास्तविक वितरण के बीच अंतर के कारण सरकारी राशि के दुरुपयोग की संभावना है। उन्होंने वितरण से संबंधित अभिलेखों, आपूर्ति विवरण और लाभार्थियों को उपलब्ध कराई गई वास्तविक मात्रा की जांच कराने की मांग की है।
उच्चस्तरीय जांच और भुगतान रोकने की मांग
शिकायतकर्ता चंदन ठाकुर और स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि जांच के दौरान पुनासी जलाशय और शिकटिया बैराज से संबंधित सभी चयनित तालाबों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही जीपीएस लोकेशन, तस्वीरों, लाभार्थियों की वास्तविक पात्रता और फिंगरलिंग स्टॉकिंग की मौके पर जांच की जाए।
इसके अलावा योजना के तहत मछली के जीरा की खरीद, आपूर्ति, वितरण और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों का भी मिलान कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित मत्स्य प्रसार पदाधिकारी रविंद्र नाथ सहाय और जिला मत्स्य पदाधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि जांच के बाद वास्तविक और पात्र किसानों को योजना का पूरा लाभ दिलाया जाए तथा उनके बकाया हक का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
अब इस मामले में जिला प्रशासन की जांच और उसके निष्कर्ष पर स्थानीय किसानों की नजरें टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि लाभार्थियों के चयन, मछली के जीरा की आपूर्ति और वितरण की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
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