टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने दोबारा कार्यकाल न लेने का ऐलान करते हुए इस्तीफा दे दिया है।इस खबर के सामने आते ही बुधवार को शेयर बाजार में टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे ग्रुप का मार्केट कैप करीब ₹46,000 करोड़ घट गया।
नई दिल्ली। भारतीय कॉर्पोरेट जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद की जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। 18 अगस्त 2026 को होने वाली टाटा संस की एजीएम (AGM) से ठीक पहले आई इस खबर ने शेयर बाजार को चौंका दिया है। इस फैसले के सार्वजनिक होते ही बुधवार को शेयर बाजार में टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
टाटा ग्रुप को ₹46,000 करोड़ का नुकसान चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर आते ही निवेशकों ने टाटा ग्रुप के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू कर दी। कुछ ही घंटों के भीतर टाटा ग्रुप की कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) करीब ₹46,000 करोड़ घट गया।
टाटा ग्रुप की सबसे फ्लैगशिप कंपनी TCS का शेयर करीब 4.8% तक टूटकर ₹2,322 के स्तर पर आ गया। टाटा मोटर्स (Tata Motors PV) कंपनी के शेयरों में 2.5% से 4% तक की गिरावट दर्ज की गई। तेजस नेटवर्क (Tejas Networks), टाटा कंज्यूमर (Tata Consumer), टाटा पावर (Tata Power), टाटा स्टील और टाइटन (Titan) के शेयरों में भी 1% से 2.5% तक की गिरावट देखी गई।
इस्तीफे के बाद जारी आधिकारिक बयान में एन चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप में बिताए अपने 40 सालों के सफर को याद किया। उन्होंने कहा "मैंने टाटा ग्रुप में अपने व्यावसायिक जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का अवसर मिलना मेरे लिए बेहद संतोषजनक रहा। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बड़े सम्मान और भारी जिम्मेदारी की बात रही है। मैंने बोर्ड से अनुरोध किया है कि वे नए उत्तराधिकारी का चयन जल्द से जल्द करें ताकि नेतृत्व का बदलाव सुचारू रूप से हो सके।" उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है और वे तब तक अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा संस के बोर्ड में चंद्रशेखरन के कार्यकाल को 5 साल बढ़ाने के लिए प्रस्ताव रखा गया था। 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' और 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' (जिनकी टाटा संस में 66% हिस्सेदारी है) ने भी उनके कार्यकाल विस्तार का समर्थन किया था। हालांकि, 24 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में सर्वसम्मति न बन पाने के कारण इस फैसले को टाल दिया गया था। बताया जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कुछ रणनीतिक व गवर्नेंस मुद्दों को लेकर मतभेद थे। सर्वसम्मति के अभाव में चंद्रशेखरन ने खुद ही पद से हटने का निर्णय लिया। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप का प्रदर्शन साल 2017 में साइरस मिस्त्री के हटने के बाद एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। वे टाटा परिवार से बाहर के पहले ऐसे पेशेवर थे, जिन्हें इस पद की जिम्मेदारी मिली। उनके 9 साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की।
