खोड़ा दूसरे और गजरौला तीसरे स्थान पर, प्रदेश के 27 शहरों में एक भी शहर की हवा WHO के सुरक्षित मानक पर खरी नहीं उतरी : आराधना मिश्रा ‘मोना’
रविशंकर सिंह, रायबरेली/लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक होता जा रहा है और सरकार इस गंभीर समस्या से निपटने के बजाय प्रचार और आयोजनों में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में छह उत्तर प्रदेश के हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि देश के तीन सर्वाधिक प्रदूषित शहर भी उत्तर प्रदेश में ही स्थित हैं।
आराधना मिश्रा ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की 5 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट ‘इंडिया मंथली एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्नैपशॉट – अक्टूबर 2026’ का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट प्रदेश में वायु प्रदूषण की भयावह तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में बड़ौत (बागपत), खोड़ा (गाजियाबाद) और गजरौला (अमरोहा) क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
उन्होंने कहा कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर शामिल हैं। इनमें बड़ौत, खोड़ा, गजरौला, गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ शामिल हैं। प्रदेश के 27 शहरों की वायु गुणवत्ता का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि एक भी शहर ऐसा नहीं है, जहां हवा में पीएम 2.5 का औसत स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानक के भीतर हो।
बड़ौत देश का सबसे प्रदूषित शहर, WHO की सीमा से छह गुना अधिक प्रदूषण
कांग्रेस विधायक ने कहा कि बागपत जिले का बड़ौत अक्टूबर महीने में देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां पीएम 2.5 का औसत स्तर 87 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो WHO की निर्धारित 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सुरक्षित सीमा से लगभग छह गुना अधिक है। अक्टूबर के 29 दिनों के उपलब्ध आंकड़ों में 24 दिन प्रदूषण WHO की सीमा से चार गुना से अधिक रहा। इनमें 10 दिन प्रदूषण छह गुने से ऊपर और पांच दिन आठ गुने से भी अधिक दर्ज किया गया।
खोड़ा दूसरे और गजरौला तीसरे स्थान पर
गाजियाबाद जिले के खोड़ा में अक्टूबर के दौरान पीएम 2.5 का औसत स्तर 85 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यह WHO की सुरक्षित सीमा से लगभग छह गुना अधिक है। महीने के 31 दिनों में से 28 दिन यहां प्रदूषण निर्धारित सीमा से चार गुना ज्यादा रहा। 11 दिनों में प्रदूषण छह गुने से ऊपर और दो दिनों में आठ गुने से भी अधिक दर्ज किया गया।
वहीं, अमरोहा जिले का गजरौला देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां अक्टूबर के दौरान प्रदूषण का औसत स्तर WHO की सुरक्षित सीमा से चार से छह गुना के बीच रहा। 31 दिनों में से 24 दिन प्रदूषण चार गुने से अधिक दर्ज किया गया। इनमें 11 दिन छह गुने से ऊपर और दो दिन आठ गुने से अधिक प्रदूषण रहा।
गाजियाबाद में आधे महीने तक छह गुने से ज्यादा प्रदूषण
आराधना मिश्रा ने गाजियाबाद की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि यहां अक्टूबर महीने में 31 दिनों में से 24 दिन प्रदूषण WHO की सुरक्षित सीमा से चार गुने से अधिक रहा। 15 दिनों तक प्रदूषण छह गुने से ऊपर दर्ज किया गया। पूरे महीने एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब हवा में पीएम 2.5 का स्तर WHO की सुरक्षित सीमा के दोगुने से नीचे आया हो।
नोएडा और मेरठ में भी जहरीली हवा से राहत नहीं
देश की प्रमुख औद्योगिक और आईटी नगरी के रूप में पहचान रखने वाले नोएडा की हवा भी अक्टूबर में प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित रही। देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में नोएडा नौवें स्थान पर रहा। यहां 31 दिनों में से 25 दिन प्रदूषण WHO की सुरक्षित सीमा से चार गुने से अधिक रहा। सात दिनों में यह छह गुने से ऊपर और दो दिनों में आठ गुने से अधिक दर्ज किया गया। पूरे महीने एक भी दिन प्रदूषण सुरक्षित सीमा के दोगुने से नीचे नहीं आया।
इसी तरह मेरठ देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दसवें स्थान पर रहा। यहां अक्टूबर के दौरान 23 दिन प्रदूषण WHO की सुरक्षित सीमा से चार गुने से अधिक दर्ज किया गया। पांच दिन प्रदूषण छह गुने से ऊपर रहा, जबकि इनमें से तीन दिन यह आठ गुने को भी पार कर गया।
उत्तर प्रदेश के 27 शहरों में एक भी शहर सुरक्षित सीमा के भीतर नहीं
कांग्रेस विधायक ने कहा कि प्रदूषण की समस्या केवल कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। CREA की रिपोर्ट में शामिल उत्तर प्रदेश के 27 शहरों में से 13 शहरों में अक्टूबर का औसत पीएम 2.5 स्तर WHO की सुरक्षित सीमा से चार से छह गुना के बीच रहा। वहीं, 11 शहरों में यह स्तर दो से चार गुना दर्ज किया गया। इस तरह रिपोर्ट में शामिल प्रदेश का एक भी शहर WHO के सुरक्षित मानक के भीतर नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि पीएम 2.5 बेहद सूक्ष्म प्रदूषक कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से दमा, हृदय रोग और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर पड़ता है।
भाजपा सरकार प्रचार में व्यस्त, जनता जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर
आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं और अब जहरीली हवा लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार प्रचार और इवेंट में व्यस्त है, जबकि प्रदेश की जनता स्वच्छ हवा के लिए संघर्ष कर रही है। यह स्थिति सरकार की पर्यावरणीय नीतियों और प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि CREA की रिपोर्ट का तत्काल संज्ञान लेते हुए प्रदूषण प्रभावित शहरों में ठोस और समयबद्ध कदम उठाए जाएं। औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषणकारी स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
अंत में आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश के नागरिकों को शुद्ध हवा, शुद्ध पानी और शुद्ध भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन की सरकार बनने पर प्रत्येक नागरिक के लिए इन बुनियादी सुविधाओं को हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा।
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