धनबाद । निरसा में आदिवासी समाज के महान स्वतंत्रता सेनानी सिदो-कान्हू की प्रतिमा का धनुष तोड़े जाने की घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। घटना के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने निरसा थाना के समक्ष प्रदर्शन किया और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सिदो-कान्हू केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों में शामिल हैं। उनकी प्रतिमा के साथ की गई तोड़फोड़ समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटना है। ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना के बाद भी अब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने और मामले का खुलासा करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस दौरान थाना परिसर के बाहर नारेबाजी भी की गई और प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की गई।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील भी की।
सिदो-कान्हू का ऐतिहासिक महत्व
सिदो और कान्हू मुर्मू ने वर्ष 1855 में संथाल हूल (विद्रोह) का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजी शासन और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष छेड़ा था। झारखंड सहित पूरे देश में उन्हें आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक के रूप में सम्मान दिया जाता है। ऐसे में उनकी प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की घटना को लेकर लोगों में स्वाभाविक रूप से गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
