भागलपुर। विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए बन रहा मुंगेर–मिर्जाचौकी राष्ट्रीय राजमार्ग कहीं आसपास के दर्जनों गांवों के लिए बाढ़ का नया संकट न बन जाए। इसी आशंका को लेकर भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड के मोकिमपुर गांव के निवासी चन्द्रदीप पाण्डेय ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर समय रहते हस्तक्षेप की मांग की है।


चन्द्रदीप पाण्डेय ने अपने पत्र में सड़क निर्माण का विरोध नहीं किया है। उन्होंने साफ लिखा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पूरे क्षेत्र के विकास का माध्यम बनेगा, लेकिन यदि जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं हुई तो इसका खामियाजा 10 से 12 गांवों के हजारों लोगों को भुगतना पड़ सकता है।


पत्र में बताया गया है कि मोकिमपुर गांव से कुछ किलोमीटर उत्तर बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप चांदन नदी बहती है। हर वर्ष बरसात के मौसम में गंगा में बाढ़ आने पर दक्षिण की बरसाती नदियों का पानी इसी चांदन नदी के रास्ते नाथनगर होकर गंगा में पहुंचता है। इस दौरान करीब 15 से 20 दिनों तक सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न रहती है और किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो जाती है।


चन्द्रदीप पाण्डेय ने आशंका जताई है कि यदि राजमार्ग निर्माण के दौरान जल निकासी के वैज्ञानिक उपाय नहीं किए गए, तो पानी का दबाव दक्षिण दिशा में और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर राजमार्ग के दक्षिण स्थित लगभग 10 से 12 गांवों पर पड़ेगा।


बाढ़ से बचाव का दिया व्यावहारिक फॉर्मूला


पत्र की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल समस्या नहीं उठाई गई, बल्कि उसका समाधान भी सुझाया गया है। चन्द्रदीप पाण्डेय ने केंद्रीय मंत्री से चांदन नदी की ड्रेजिंग (गाद हटाने) का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि इससे तीन बड़े लाभ होंगे—

  1. नदी की गहराई और चौड़ाई बढ़ेगी, जिससे बाढ़ का खतरा कम होगा।
  2. बरसात के बाद नदी में पर्याप्त जल रहेगा, जिसका उपयोग किसान सिंचाई के लिए कर सकेंगे।
  3. ड्रेजिंग से निकली बालू और मिट्टी का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में भी किया जा सकेगा।


विशेषज्ञों से सर्वे कराने की मांग

उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि विशेषज्ञों की टीम भेजकर पूरे क्षेत्र का अध्ययन कराया जाए और ऐसा स्थायी समाधान निकाला जाए, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण भी निर्बाध रूप से हो और ग्रामीणों को बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा का अतिरिक्त बोझ भी न झेलना पड़े। चन्द्रदीप पाण्डेय ने अपने पत्र में नितिन गडकरी की कार्यशैली और त्वरित निर्णय क्षमता पर भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि उनकी इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की यह पहल अब केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार कर रही है।