चंपारण के गोपालपुर में रूह कंपा देने वाली घटना! चुप नहीं होने पर 6 महीने की मासूम बेटी का मां ने ही हंसुए से रेता गला। हत्या के बाद खुदकुशी का प्रयास कर दुपट्टे में छिपाया घाव। पढ़ें कंचनक्रांति की यह बेहद मार्मिक और स्तब्ध कर देने वाली ग्राउंड रिपोर्ट।
चंपारण में रूह कंपा देने वाली वारदात; बेटी की जान लेने के बाद खुदकुशी की कोशिश, दुपट्टे में छिपाती रही गर्दन का घाव; दादी लौटी तो बिछावन पर पड़ा था खून से लथपथ शव
कंचनक्रांति ब्यूरो / पटना। कहते हैं इस दुनिया में मां के आंचल से महफूज और पवित्र कोई जगह नहीं होती। बच्चा जब रोता है, तो मां का दिल तड़प उठता है। लेकिन पश्चिम चंपारण के गोपालपुर थाना क्षेत्र से एक ऐसी खौफनाक और दिल को चीर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मां शब्द की परिभाषा को ही सुन्न कर दिया है। बड़ा गोपालपुर (वार्ड-8) में गुरुवार की दोपहर एक मां ने अपनी ही छह महीने की दुधमुंही बच्ची को सिर्फ इसलिए मौत की नींद सुला दिया, क्योंकि वह लगातार रो रही थी और चुप नहीं हो रही थी।
यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के भीतर के उस अंधेरे और विक्षिप्त मानसिक तनाव की दास्तान है, जिसने चंद सेकेंड के गुस्से में उसकी कोख को ही उजाड़ दिया।
आपा खोया और ममता बन गई हैवान
सुनील दास की 6 महीने की मासूम बेटी पूजा कुमारी दोपहर के वक्त लगातार रोए जा रही थी। मां सीमा देवी (25 वर्ष) उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी। लेकिन जब बच्ची की सिसकियां बंद नहीं हुईं, तो सीमा के भीतर का आपा खो गया। पहली नजर में मानसिक रूप से अस्वस्थ दिख रही सीमा के सिर पर न जाने कौन सा खून सवार हुआ कि उसने घर में रखे फहसूल (हंसुए) को उठाया और अपनी ही लाडली का गला रेत दिया। आधी कटी गर्दन के साथ वह मासूम चंद पलों में ही इस बेरहम दुनिया से विदा हो गई। बिछावन, जो कुछ देर पहले तक मासूम की किलकारियों से गूंज रहा था, वह खून से लाल हो चुका था।
गुनाह छिपाने का खौफनाक नाटक
मासूम पूजा की सांसें थमते ही शायद सीमा को अपनी भूल का अहसास हुआ। खौफ और आत्मग्लानि में उसने उसी फहसूल से अपने ही गले पर वार कर दिया। लेकिन जैसे ही धारदार फहसूल उसकी त्वचा में धंसी, दर्द के मारे उसके हाथ ठिठक गए। इसके बाद शुरू हुआ गुनाह को दुनिया से छिपाने का वो खौफनाक सिलसिला, जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान है। सीमा ने अपनी गर्दन से बहते खून को पोछा और गले पर कसकर दुपट्टा लपेट लिया, ताकि बाहर से किसी को घाव न दिखे।
"वह सो रही है..." कहकर दादी को गुमराह किया
बच्ची की दादी सुरसती देवी घटना से पहले पास के बैशखवा बाजार गई हुई थीं। शाम को जब वह घर लौटीं, तो उन्होंने अपनी पोती के बारे में पूछा। सीमा ने बेहद पथराई आंखों और शांत आवाज में कहा— "वह सो रही है, उसे डिस्टर्ब मत करो।" इस बात से बेखबर दादी सरेह (खेतों की तरफ) चली गईं। लेकिन नियति को यह पाप छिपाना मंजूर नहीं था। शाम ढलते-ढलते गांव में यह बात हवा की तरह फैल गई कि घर के भीतर कुछ अनहोनी हुई है। जब दादी भागती हुई घर पहुंचीं और बिछावन से चादर हटाई, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी 6 महीने की पोती खून से लथपथ मृत पड़ी थी।
पुलिस की कार्रवाई: मानसिक बीमारी की आशंका
रात करीब 8 बजे जब इस खौफनाक वारदात की खबर पूरे इलाके में फैली, तब पुलिस को सूचना दी गई। रात 9 बजे थानाध्यक्ष अंकित कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बिछावन से खून से सनी चादर और कत्ल में इस्तेमाल फहसूल को बरामद कर लिया है।
आरोपी मां सीमा देवी को हिरासत में लेकर चनपटिया सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां उसकी गर्दन पर चार टांके लगे हैं। शुक्रवार सुबह दादी सुरसती देवी के फर्द बयान पर एफआईआर दर्ज की गई है। थानाध्यक्ष अंकित कुमार ने बताया, "शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पहली नजर में महिला मानसिक रूप से काफी कमजोर (डिप्रेशन या विक्षिप्त) लग रही है। आरोपी मां को जेल भेजने की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।"
इस घटना ने पूरे चंपारण को झकझोर कर रख दिया है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि एक मां इतनी निष्ठुर कैसे हो सकती है, वहीं यह घटना समाज में महिलाओं के प्रसव के बाद होने वाले मानसिक तनाव (Postpartum Psychosis/Depression) की तरफ भी एक गंभीर और डरावना इशारा करती है।
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