प्रवाह संस्था द्वारा मिलेट्स (श्रीअन्न) के संरक्षण, संवर्धन और उत्पादन को लेकर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट। जानिए इसके स्वास्थ्य लाभ, कृषि महत्व और इस अभियान से जुड़ी खास बातें
सोनारायठाढ़ी (देवघर)। मिलेट्स (मोटे अनाज) के संरक्षण, संवर्धन, उत्पादन एवं दैनिक आहार में इनके उपभोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को सोनारायठाढ़ी प्रखंड में प्रवाह संस्था की ओर से जागरूकता पब्लिक मीटिंग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रख्यात मिलेट विशेषज्ञ एवं पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. खादर वली, रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम देवघर के सचिव स्वामी राधाकांत आनंद, तथा प्रवाह संस्था के सचिव श्री दिलीप कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रवाह संस्था के सचिव श्री दिलीप कुमार एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर डॉ. खादर वली ने किसानों एवं ग्रामीणों को मिलेट्स के महत्व, इसकी खेती, संरक्षण तथा नियमित उपभोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिलेट्स पोषण से भरपूर पारंपरिक अनाज हैं, जिन्हें दैनिक भोजन में शामिल करना चाहिए। इनके नियमित सेवन से संतुलित एवं स्वस्थ आहार को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने मधुमेह, जोड़ों की समस्याओं, पाचन संबंधी परेशानियों सहित विभिन्न जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने में संतुलित खानपान की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से पारंपरिक बीजों को संरक्षित करने और मिलेट्स की खेती को फिर से बढ़ावा देने की अपील की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रवाह संस्था के सचिव श्री दिलीप कुमार ने बताया कि संस्था द्वारा "द ग्रीन रिवोल्यूशन प्रोग्राम" के तहत देवघर जिले के सोनारायठाढ़ी प्रखंड में मिलेट्स के संरक्षण, उत्पादन एवं संवर्धन को लेकर लगातार कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बीज बैंक के माध्यम से पारंपरिक मिलेट्स के बीजों का संरक्षण किया जा रहा है। साथ ही लीड फार्मर्स की सक्रिय भागीदारी से इस वर्ष लगभग 30 एकड़ भूमि में मिलेट्स की खेती की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में भी संस्था के प्रयासों से 50 एकड़ से अधिक भूमि को मिलेट्स की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को खेती-किसानी के साथ-साथ आर्थिक बचत के प्रति जागरूक करने की एक अनूठी पहल भी की गई। इसके तहत प्रत्येक किसान को एक गुल्लक प्रदान की गई। किसानों को सुझाव दिया गया कि वे प्रतिदिन अपने अनावश्यक खर्चों में थोड़ी कटौती कर उसमें बचत करें, ताकि अगले कृषि सीजन में उस राशि का उपयोग खेती से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में कर सकें। इस पहल का उद्देश्य किसानों में बचत की आदत विकसित करने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

इस अवसर पर प्रवाह संस्था के अन्य कार्यकर्ताओं ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया और किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में जागरूक किया। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए पारंपरिक खेती, जैविक उत्पादन, बीज संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों एवं ग्रामीणों ने मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने, पारंपरिक बीजों का संरक्षण करने तथा अपने दैनिक भोजन में मोटे अनाज को शामिल करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन स्वस्थ भोजन, समृद्ध खेती और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के संदेश के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रवाह संस्था की टीम में सुरेश प्रसाद, ओंकार पाठक, पांडु कुमार, श्याम लाल, शिवम, प्रीति, जगन्नाथ आदि मौजूद रहे।