धनबाद। कतरास क्षेत्र अंतर्गत केशलपुर मुंडा धौड़ा में एक बार फिर भूधंसान की घटना सामने आई है। रविवार को हुए भूधंसान के कारण पहले से खाली कराए गए छह आवास पूरी तरह जमीन में समा गए। घटना में पास स्थित एक मंदिर को भी आंशिक क्षति पहुंची है। हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी आवास पहले से खाली करा लिए गए थे, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।


घटना की सूचना मिलते ही बीसीसीएल के सहायक खान प्रबंधक मौके पर पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे इलाके को लाल फीता (रेड टेप) लगाकर घेर दिया गया है, ताकि कोई व्यक्ति खतरे वाले क्षेत्र में प्रवेश न कर सके।


स्थानीय लोगों के अनुसार, भूधंसान के दौरान तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी। देखते ही देखते छह आवास मलबे में तब्दील हो गए। आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है। मंदिर की दीवार और फर्श में भी दरारें आने की सूचना है, जिससे धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।


पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं


केशलपुर मुंडा धौड़ा और कतरास का यह इलाका लंबे समय से भूधंसान की समस्या से जूझ रहा है। यहां भूमिगत कोयला खनन के कारण जमीन कमजोर होती जा रही है। कई स्थानों पर पुराने और परित्यक्त खदानों के ऊपर बसे आवासीय क्षेत्रों में समय-समय पर जमीन धंसने की घटनाएं होती रही हैं।


पूर्व में भी प्रशासन और बीसीसीएल ने कई मकानों को असुरक्षित घोषित कर लोगों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया था। इसके बावजूद क्षेत्र के कई हिस्सों में भूधंसान का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोग लंबे समय से सुरक्षित पुनर्वास और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।


बीसीसीएल ने की निगरानी तेज


सहायक खान प्रबंधक ने प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने के बाद अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया। फिलहाल पूरे इलाके की निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों को धंसान वाले क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी गई है। जरूरत पड़ने पर आसपास के अन्य मकानों का भी तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा।


स्थानीय प्रशासन और बीसीसीएल की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों द्वारा जमीन की स्थिरता का आकलन किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।


स्थानीय लोगों में दहशत, पुनर्वास की मांग तेज


लगातार हो रही भूधंसान की घटनाओं से क्षेत्र के लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक पूरे इलाके का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर सुरक्षित पुनर्वास नहीं किया जाता, तब तक ऐसे हादसों की आशंका बनी रहेगी। लोगों ने सरकार और बीसीसीएल से स्थायी समाधान और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है।