देवघर में राज्यस्तरीय विधिक सेवा एवं सशक्तिकरण शिविर का उद्घाटन करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था को अस्पताल की तरह संवेदनशील बनाने और गरीबों तक कानूनी सहायता पहुंचाने पर जोर दिया।

तरुण कुमार कंचन, देवघर।

बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर पहुंचे भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार को सबसे पहले बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद देवघर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा एवं सशक्तिकरण शिविर में शामिल होकर उन्होंने न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और जनोन्मुखी बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली का व्यवहार अस्पताल की तरह संवेदनशील होना चाहिए, जहां मरीज को इलाज के साथ सांत्वना और भरोसा भी मिलता है। इसी तरह न्यायिक व्यवस्था में भी जरूरतमंदों को अपनापन और न्याय मिलने का विश्वास महसूस होना चाहिए।


शिविर के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि गरीब, वंचित और सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कानूनी सहायता के लिए अदालतों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें, बल्कि विधिक सेवा प्राधिकरण खुद उनके दरवाजे तक पहुंचे। गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए।

न्यायिक व्यवस्था में भी मरीज के प्रति डॉक्टर जैसा संवेदनशील व्यवहार जरूरी

न्यायपालिका और स्वास्थ्य सेवा के बीच समानता बताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टर या नर्स के सांत्वना भरे शब्द मरीज को काफी राहत देते हैं। कई बार उपचार के साथ संवेदनशील व्यवहार भी मरीज का भरोसा बढ़ाता है। इसी तरह न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के व्यवहार में भी संवेदनशीलता, सहानुभूति और अपनापन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तालुका अदालतों से लेकर जिला न्यायालयों और उच्च न्यायालयों तक समाज के कमजोर वर्गों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए न्याय के दरवाजे हमेशा खुले रहने चाहिए। न्यायिक संस्थाओं का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को न्याय का भरोसा दिलाना भी होना चाहिए।

स्थानीय भाषा और बोली में हो आम लोगों से संवाद

सीजेआई ने विधिक सेवा कार्यकर्ताओं को आम लोगों से उनकी स्थानीय भाषा और बोली में संवाद करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के लोगों की अपनी भाषा में उनकी समस्याएं नहीं सुनी जाएंगी, तब तक न्याय व्यवस्था और आम जनता के बीच की दूरी कम नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि कानूनी औपचारिकताओं से आगे बढ़कर लोगों की बात समझना, उनकी परेशानियों को जानना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। स्थानीय भाषा में संवाद से आम लोगों का न्यायिक व्यवस्था के प्रति भरोसा और मजबूत होगा।

प्रोजेक्ट शिशु की सराहना, दूसरे राज्यों में भी लागू करने पर जोर

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) की ओर से संचालित प्रोजेक्ट शिशु की मुख्य न्यायाधीश ने विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल समाज के वंचित बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन सकती है।

इस परियोजना के तहत गरीबी, भुखमरी और विपरीत सामाजिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा से दूर होकर बाल श्रम में धकेले गए बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सीजेआई ने इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचे कानूनी जागरूकता अभियान

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विधिक सहायता और कानूनी जागरूकता का दायरा केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे सुदूर आदिवासी गांवों और दुर्गम इलाकों तक पहुंचाना होगा, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

उन्होंने कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को अपने कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक वह अपने हक के लिए आवाज नहीं उठा सकेगा। विधिक सेवा प्राधिकरण का निरंतर संचालित होने वाला रीच आउट कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचकर उन्हें कानूनी सहायता और अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद

राज्यस्तरीय विधिक सेवा एवं सशक्तिकरण शिविर के उद्घाटन समारोह में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ झारखंड निवासी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर, झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. मुखोपाध्याय तथा झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद मंच पर उपस्थित थे।

कार्यक्रम में देवघर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर झा, संताल परगना के आयुक्त शैलेंद्र कुमार लाल, जोनल डीआईजी अंबर लकड़ा, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया, पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर, डीडीसी पीयूष सिन्हा, एसडीओ रवि कुमार और नगर आयुक्त सुलोचना मीणा सहित विभिन्न न्यायिक, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और आम नागरिकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

देवघर एयरपोर्ट पर सीजेआई को दी गई गरिमामयी विदाई

देवघर प्रवास और कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने देवघर एयरपोर्ट से प्रस्थान किया। इस अवसर पर एयरपोर्ट परिसर में जिला प्रशासन की ओर से उन्हें ससम्मान विदाई दी गई।

इस दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिह्न के रूप में हस्तनिर्मित बाबा बैद्यनाथ मंदिर का मोमेंटो भेंट किया। उन्होंने बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी देवघर की ओर से उनका अभिवादन करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दी।

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