बांका जिले के चांदन अंचल अधिकारी रविकांत कुमार को विशेष सतर्कता इकाई ने 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। जमीन पर कब्जा दिलाने के एवज में मांगी गई थी घूस। पढ़ें पूरी खबर।
आमोद कुमार दुबे, बांका
जमीन पर कब्जे के बदले मांगी गई राशि पर पीड़ित की सूचना मिलते ही विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने 9 सितंबर 2026 को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बांका जिले के चांदन अंचल अधिकारी रविकांत कुमार को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। विशेष सतर्कता इकाई की इस अचानक कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
जमीन पर दखल-कब्जा दिलाने के लिए मांगी थी दो लाख की घूस
विशेष सतर्कता इकाई के अपर पुलिस महानिदेशक सुधांशु कुमार के अनुसार, चांदन थाना क्षेत्र के कोरिया पंचायत के लठाने निवासी परिवादी सियाराम कुमार झा ने पटना स्थित इस टीम के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी का आरोप था कि कोर्ट के आदेश के आलोक में संबंधित जमीन पर दखल-कब्जा दिलाने के एवज में अंचल अधिकारी रविकांत कुमार द्वारा 2,00,000 (दो लाख) रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी और तत्काल 20-25 हजार रुपये देने का दबाव बनाया जा रहा था।
सत्यापन में शिकायत सही मिलने पर दर्ज हुआ केस
शिकायत मिलने के बाद टीम ने पूरे मामले का गोपनीय तरीके से सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान अंचल अधिकारी रविकांत कुमार द्वारा परिवादी सियाराम कुमार झा से रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद आरोपी सीओ के खिलाफ विशेष सतर्कता इकाई थाना में कांड संख्या 24/2026 दर्ज किया गया।
डीएसपी के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाकर दबोचा
प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस उपाधीक्षक अरुण कुमार अकेला के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया। टीम ने चांदन में योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और जैसे ही परिवादी ने अंचल अधिकारी रविकांत कुमार को 20,000 रुपये की पहली किश्त सौंपी, टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
आरोपी सीओ से पूछताछ और दलाली की व्यवस्था का खुलासा
रिश्वत की राशि के साथ गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी अंचल अधिकारी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। विभाग द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया और गहन अनुसंधान की कार्रवाई की जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गिरफ्तार सीओ के कार्यकाल में अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर था और बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता था। यहां तक कि अपर समाहर्ता और डीसीएलआर के आदेश का पालन भी रिश्वत लेकर किया जाता था, जिस कारण लोगों को आदेश मिलने के बावजूद वर्षों कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। हर प्रकार के काम के लिए पंचायतवार दलाल नियुक्त थे, जिसमें सीओ का वाहन चालक भुवन प्रसाद मुख्य भूमिका निभाता था। सीओ की गिरफ्तारी के बाद दलालों को छोड़कर आम जनता में काफी खुशी का माहौल है।
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