देवघर के पथरोल थाना क्षेत्र में महिला को पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश, मासूम बच्चों को छीना। पुलिस पर कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप। जानिए पूरी खबर।
चंदन कुमार ठाकुर, मधुपुर (देवघर)।
कानून के रखवालों की नींद इतनी गहरी कैसे हो सकती है कि किसी लाचार महिला की चीखें और मासूम बच्चों की बिलखती आवाजें भी उन्हें झकझोर न सकें? इसकी एक बानगी देवघर जिले के पथरोल थाना क्षेत्र के जरलाही गाँव में देखने को मिल रही है। 29 वर्षीया अनीता कुमारी आज लहूलुहान होकर न्याय की भीख मांग रही है। उसके शरीर पर लाठी-डंडों के निशान हैं, गले पर गला घोंटे जाने की खरोंचें हैं, और मन में अपने मासूम बच्चों को खोने का गहरा खौफ है, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही है।
खाना तैयार न होने पर दरिंदों ने लांघी सारी सीमाएं
यह खौफनाक मामला बीते 28 मार्च 2026 की रात का है। महज़ इतनी सी बात पर कि समय पर खाना तैयार नहीं था, घर के दरिंदों ने सारी मानवीय मर्यादाएं लांघ दीं। आरोप है कि पति जीतन रवानी, सास बचनी देवी, ननद मोनी देवी और ससुर सीताराम रवानी ने मिलकर अनीता पर लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से कातिलाना हमला कर दिया।
पति ने जान से मारने की नीयत से उसके माथे पर लाठी से वार किया, ननद ने बाल पकड़कर बर्बरता से पीटा, और फिर उकसावे में आकर पति ने अनीता का गला तब तक दबाया जब तक वह बेहोश होकर जमीन पर गिर नहीं गई। दरिंदगी की इंतहा तो तब हो गई, जब जान बचाकर भागने की कोशिश कर रही अनीता पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने का प्रयास किया गया!
मासूम बच्चों को भी छीना, लहूलुहान माँ को धक्के देकर निकाला बाहर
जब पीड़ित महिला अपनी जान बचाने के लिए अपने 11 साल के बेटे और 8 साल की बेटी को साथ लेकर भागने लगी, तो बेरहम ससुराल वालों ने उसके दोनों मासूम बच्चों को जबरन उससे छीन लिया। इसके बाद खून से लथपथ तड़पती हुई माँ को धक्के देकर घर से बाहर बेघर कर दिया।
पथरोल पुलिस की कार्यशैली पर खड़े होते गंभीर सवाल
घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्यशैली और उसकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक महिला का गला दबाया गया, पेट्रोल से जलाने की कोशिश हुई और बच्चों का अपहरण हुआ, फिर भी आरोपी अभी तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं? गुरुवार को सुबह जब 'कंचन क्रांति' के रिपोर्टर ने इस मामले पर पुलिस का पक्ष जानने के लिए थाना प्रभारी को फोन मिलाया, तो उन्होंने कॉल रिसीव तक नहीं किया। क्या पथरोल पुलिस जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है?
अनीता कुमारी आज न्याय और अपने जिगर के टुकड़ों (मासूम बच्चों) की सलामती के लिए दर-दर ठोकर खाने को मजबूर है। यदि पथरोल थाना पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की और आरोपियों को गिरफ्तार कर बच्चों को माँ के सुपुर्द नहीं किया, तो यह मामला सिर्फ थाने तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से अनिता ने गुहार लगाई है। समय रहते पुलिस और प्रशासन द्वारा इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो बखेड़ा बढ़ सकता है।
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