अंधविश्वास के चलते एक भाई ने अपनी ही दो सगी बहनों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। आरोपी ओझा-गुणी के फेर में था और उसने खुद थाने पहुंचकर सरेंडर किया। पढ़ें पूरी खबर।


जमशेदपुर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ प्रखंड अंतर्गत बंगाल की सीमा से सटे बाबईदा गांव में अंधविश्वास का एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। यहां एक भाई ने डायन-बिसाही के अंधविश्वास और भ्रम के संदेह में अपनी ही दो सगी बड़ी बहनों की कुल्हाड़ी से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खुद थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी स्वरूप टुडू लंबे समय से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित चल रहा था। अपनी बीमारी के इलाज के लिए वह डॉक्टरों की बजाय ओझा-गुणी (तांत्रिक) के चक्कर में फंसा हुआ था।

आरोपी के कहने पर ओझा ने कथित तौर पर दोनों बहनों पर साया होने या डायन होने का अंदेशा जताया था। इसी के बहकावे में आकर स्वरूप ने रविवार की शाम अपनी दोनों बड़ी बहनों दुलारी सोरेन (55) और लक्ष्मी मार्डी (50) को उनके ससुराल से अपने घर बुलाया था। दुलारी की ससुराल चरईगोड़ा और लक्ष्मी की ससुराल बासाझोर गांव में है।

ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार अहले सुबह दोनों बहनों के सामने घर में विशेष पूजा-पाठ की गई और इसके बाद स्वरूप ने कुल्हाड़ी से वार कर दोनों की निर्मम हत्या कर दी।

हत्या के बाद आरोपी ने घर के मुख्य दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया और खुद पैदल ही धालभूमगढ़ थाना पहुंचकर पुलिस को घटना की जानकारी दी।

थाने में जब आरोपी स्वरूप ने अजीबोगरीब बातें की और पुलिसकर्मियों को ठीक से घटना की जानकारी नहीं दी, तो पुलिस को शक हुआ। इस बीच पंचायत के मुखिया को मामले की भनक लगी। ग्रामीणों की मदद से जब छत के रास्ते एक व्यक्ति को घर के भीतर उतारा गया, तब इस दोहरे हत्याकांड का खौफनाक सच सामने आया। पुलिस मौके पर पहुंची और घर की तलाशी के दौरान भारी मात्रा में पूजा-सामग्री, तांत्रिक अनुष्ठान के साक्ष्य तथा विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक व एलोपैथिक दवाइयां बरामद कीं।

दुलारी सोरेन (पति की मृत्यु हो चुकी है, उनका एक 13 वर्ष का बेटा है) और लक्ष्मी मार्डी (इनके पुत्र लच्छू राम मार्डी और मुनीराम मार्डी हैं)।

आरोपी स्वरूप टुडू घर पर रहकर खेती-बाड़ी का काम करता है। उसकी शादी तीन साल पहले ढांगाकमल गांव में हुई थी, लेकिन उसकी पत्नी अब उसके साथ नहीं रहती है। गिरफ्तारी के दौरान थाना में आरोपी ने बस इतना कहा कि "मेरा दिमाग काम नहीं किया, इसलिए मैंने ऐसा कर दिया।"

मामले की गंभीरता को देखते हुए धालभूमगढ़ थाना प्रभारी नीरज मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों से पूछताछ और घर में मिली पूजा सामग्री से यह स्पष्ट है कि इस जघन्य हत्याकांड को ओझा-गुणी के अंधविश्वास के चक्कर में अंजाम दिया गया है। पुलिस ने आरोपी स्वरूप टुडू को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।

बंगाल सीमा से सटे इस ग्रामीण इलाके में हुई इस घटना के बाद से लोग स्तब्ध हैं और आधुनिक युग में भी समाज में व्याप्त अंधविश्वास की जड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।


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