भारतीय पावर सेक्टर के भीष्म पितामह और पावरग्रिड के पूर्व CMD डॉ. आरपी सिंह का दिल्ली में निधन। कैमूर के घटेया गांव के लाल, जिन्हें 2003 में अमेरिकी ब्लैकआउट के बाद विशेष आमंत्रण मिला था। पढ़ें कंचन क्रांति की विशेष श्रद्धांजलि रिपोर्ट।
कंचन क्रांति ब्यूरो, पटना
भारतीय पावर सेक्टर के शिल्पी और 'भीष्म पितामह' माने जाने वाले पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) डॉ. आरपी सिंह का गुरुवार की मध्यरात्रि 12:30 बजे नई दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही कैमूर सहित पूरे बिहार और देश के ऊर्जा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों, अभियंताओं एवं विभिन्न संगठनों ने उनके निधन को देश के विद्युत क्षेत्र की एक ऐसी अपूर्णीय क्षति बताया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
डॉ. सिंह ने लगभग पांच दशकों तक भारतीय विद्युत क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनके निधन से न केवल कैमूर ने अपना गौरवशाली सपूत खोया है, बल्कि भारतीय विद्युत क्षेत्र ने भी एक दूरदर्शी अभियंता, कुशल प्रशासक और राष्ट्रनिर्माता को खो दिया है।
जब अमेरिका में छाया था अंधेरा, तब बुलावा आया था भारत से
डॉ. आरपी सिंह की तकनीकी प्रतिभा और ग्रिड प्रबंधन का लोहा सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया मानती थी। इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण वर्ष 2003 में देखने को मिला, जब अमेरिका के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में इतिहास का सबसे बड़ा 'ग्रिड ब्लैकआउट' हुआ था। महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका की बिजली व्यवस्था जब पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी, तब अमेरिकी ऊर्जा विभाग और फेडरल एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन ने भारत से डॉ. आरपी सिंह को विशेष रूप से आमंत्रित किया था। यह वैश्विक मंच पर भारतीय मेधा का सबसे बड़ा सम्मान था।
आपदाओं के बीच रिकॉर्ड समय में लाते थे 'रोशनी'
डॉ. आरपी सिंह सिर्फ दफ्तर में बैठकर नीतियां बनाने वाले अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे जमीन पर रहकर चुनौतियों को मात देने वाले सेनापति थे।
· ओडिशा का सुपर साइक्लोन (1999): विनाशकारी चक्रवात के बाद जब पूरी पारेषण प्रणाली ध्वस्त हो गई थी, तब उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर रहकर रिकॉर्ड समय में बिजली बहाल कराई।
· भुज का महा-भूकंप (2001): गुजरात में आई तबाही के दौरान भी उन्होंने अपनी असाधारण नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए विद्युत ग्रिड को वापस खड़ा किया।
पावरग्रिड का स्वर्णिम काल: वर्ष 1996 से 2008 तक पावरग्रिड के सबसे लंबे समय तक सीएमडी रहने के दौरान डॉ. सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड का तेजी से विस्तार हुआ। ऐतिहासिक 'तालचेर-कोलार एचवीडीसी ट्रांसमिशन लिंक' जैसी विशाल परियोजनाएं उन्होंने निर्धारित समय से पहले पूरी करके सबको चौंका दिया था।
सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्र निर्माण: जम्मू-कश्मीर का विद्युत पुनर्गठन
रिटायरमेंट के बाद भी डॉ. सिंह की सक्रियता कम नहीं हुई। वे जम्मू-कश्मीर की बेहद जटिल विद्युत व्यवस्था के पुनर्गठन के लिए भारत सरकार के सचिव स्तर के सलाहकार रहे। इसके अलावा वे आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) और आईआईटी भुवनेश्वर (IIT Bhubaneswar) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष भी रहे, जहाँ उन्होंने नई पीढ़ी के इंजीनियरों का मार्गदर्शन किया।
विश्व बैंक भी कर चुका है सम्मानित
IIT (BHU) से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉ. सिंह को विश्व बैंक, ईपीआरआई (अमेरिका) और भारत सरकार के स्कोप एक्सीलेंस अवार्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया था। वे सिग्रे इंडिया के अध्यक्ष सहित कई वैश्विक विद्युत संगठनों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा चुके थे। डॉ. आरपी सिंह का जीवन और उनकी सफलता की कहानी देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए हमेशा प्रेरणा का प्रतीक बनी रहेगी।
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