गया के फतेहपुर (रंगूनगर) में गुरुवार शाम 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय पीयूष को NDRF ने रात 1:55 बजे सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हाथ में मोबाइल लिए मुस्कुराते हुए निकले मासूम की पूरी रेस्क्यू स्टोरी पढ़ें कंचन क्रांति पर।
कंचन क्रांति ब्यूरो, गया।
गया। मौत के गहरे अंधेरे कुएं को मात देकर 4 साल का पीयूष आखिरकार जिंदगी की जंग जीत गया। गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत रंगूनगर गांव में गुरुवार शाम को हुए इस दर्दनाक हादसे का अंत बेहद सुखद रहा। एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय प्रशासन के अथक प्रयासों के बाद, रात के करीब 1 बजकर 55 मिनट पर मासूम पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
जब एनडीआरएफ की टीम ने बच्चे को बाहर निकाला, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी से नम हो गईं। हैरानी और राहत की बात यह थी कि रेस्क्यू के समय मासूम पीयूष के हाथ में मोबाइल था और वह सकुशल था। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल भेजा है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक बताया जा रहा है।

मां की गोद में सुकून से पीयूष
खेलते-खेलते मौत के मुंह में समा गया था मासूम
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे की है। रंगूनगर निवासी दिनेश मांझी का 4 वर्षीय पुत्र पीयूष कुमार घर के पास ही खेल रहा था। इसी दौरान वह वहां बने एक नए बोरवेल में गिर गया।
बोरे से ढका था 300 फीट गहरा बोरवेल:
ग्रामीणों के मुताबिक, यह बोरवेल हाल ही में खोदा गया था। कोई अनहोनी न हो, इसलिए इसे सिर्फ एक बोरे से ढक कर छोड़ दिया गया था। लेकिन खेलने के दौरान पीयूष का पैर फिसल गया और वह सीधे 300 फीट गहरे बोरवेल के दलदल में जा गिरा।
जंगल की आग की तरह फैली खबर, शुरू हुआ महा रेस्क्यू
घटना की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। देखते ही देखते घटनास्थल पर हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे।
बच्चे को सांस लेने में दिक्कत न हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत बोरवेल के अंदर ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की। वहीं, जेसीबी मशीनों को बुलाकर बोरवेल के समानांतर एक गहरा गड्ढा खोदने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) को मोर्चे पर बुलाया गया।
NDRF के विशेष यंत्र ने दिखाया कमाल
जैसे-जैसे रात गहराती जा रही थी, लोगों की सांसें अटक रही थीं। तभी एनडीआरएफ की टीम ने एक अनोखी तकनीक और विशेष यंत्र को बोरवेल के भीतर डाला। इस विशेष रेस्क्यू यंत्र की मदद से टीम बच्चे तक पहुंचने में कामयाब रही।
रात 1:55 बजे जैसे ही पीयूष को सुरक्षित ऊपर खींचा गया, पूरा इलाका 'भारत माता की जय' और प्रशासन के समर्थन में नारों से गूंज उठा। मासूम पीयूष का हाथ में मोबाइल लिए सुरक्षित बाहर आना किसी चमत्कार से कम नहीं था। प्रशासन और बचाव दल की इस मुस्तैदी की हर तरफ तारीफ हो रही है।

इसी बोरवेल में गिरा था पीयूष
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