बिहार के नवादा में भागलपुर जैसा आंखफोड़वा कांड। पकरीबरावां के रोहुआ गांव में अवैध शराब तस्करों ने पुलिस मुखबिरी के शक में एक रसोइए की आंख फोड़ दी। पीड़ित पटना रेफर। दोनों आरोपी गिरफ्तार।


कंचनक्रांति ब्यूरो, नवादा।

भागलपुर का वह खौफनाक 'आंखफोड़वा कांड' आज भी बिहार के इतिहास पर एक अमिट कलंक है, जिसकी याद मात्र से रूह कांप जाती है। बरसों बाद, ठीक वैसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली दरिंदगी नवादा की धरती पर दोहराई गई है। पकरीबरावां थाना क्षेत्र के रोहुआ गांव में बेखौफ अपराधियों ने एक गरीब और बेकसूर युवक को इस कदर बेरहमी से पीटा कि उसकी एक आंख ही हमेशा के लिए छीन ली। आज एक लाचार पत्नी अस्पताल के गलियारों में अपने पति की जिंदगी और रोशनी के लिए भीख मांग रही है, और तीन मासूमों के सिर से पिता का सहारा लगभग उठ चुका है।


रोटी की तलाश में गया था, जिंदगी भर का अंधेरा मिला

पीड़ित सूरज कुमार हलवाई (पिता- प्रदीप हलवाई) पेशे से रसोइया (हलवाई) है। वह शादियों और त्योहारों में खाना बनाकर अपने परिवार का पेट पालता है। शनिवार को भी वह अपने काम के सिलसिले में मजदूरों को बुलाने महादलित टोले गया था। उसे क्या पता था कि मेहनत-मजदूरी की यह तलाश उसकी जिंदगी में कभी न खत्म होने वाला अंधेरा लेकर आएगी। टोले में पहुंचते ही गांव के दबंगों ने उसे घेर लिया और लाठी-डंडे व घूंसों से उस पर टूट पड़े।


अवैध शराब के धंधेबाजों ने लगाया 'मुखबिरी' का झूठा आरोप

सूरज की पत्नी पूजा कुमारी ने जो प्राथमिकी दर्ज कराई है, वह इस व्यवस्था और समाज के मुंह पर एक करारा तमाचा है। पूजा ने रोते हुए बताया कि गांव के अवैध शराब तस्करों को शक था कि सूरज ने उनकी काली करतूतों की जानकारी पुलिस को दी है। इसी झूठी 'मुखबिरी' का आरोप लगाकर उन्होंने सूरज को घेर लिया।


तड़पता रहा युवक, मूकदर्शक बने रहे लोग

सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात यह रही कि जब हमलावर सूरज की आंख फोड़ रहे थे, वह दर्द से चीख रहा था, तब वहां दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे। लेकिन अफसोस, किसी एक का भी कलेजा नहीं पसीजा। पूरा गांव मूकदर्शक बनकर तमाशा देखता रहा, मानो किसी इंसान की आंख नहीं, बल्कि कोई खिलौना तोड़ा जा रहा हो।


अस्पताल दर अस्पताल भटक रहा परिवार

घटना के बाद खून से लथपथ सूरज को पकरीबरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत विम्स (VIMS) पावापुरी रेफर कर दिया। लेकिन डॉक्टरों के हर प्रयास के बाद भी उसकी आंख को बचाया नहीं जा सका। हालत और बिगड़ने पर अब उसे बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया है, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।


त्वरित कार्रवाई: दोनों दरिंदे सलाखों के पीछे

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पकरीबरावां पुलिस ने तत्परता दिखाई है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सुजय विद्यार्थी ने बताया कि पीड़ित की पत्नी के आवेदन पर केस दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की गई है।

थानाध्यक्ष रंजन चौधरी के नेतृत्व में पुलिस ने छापेमारी कर दोनों नामजद आरोपियों को दबोच लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बासुदेव मांझी उर्फ भगत और राकेश मांझी उर्फ राजेश मांझी (दोनों के पिता राजो मांझी) के रूप में हुई है। पुलिस दोनों से गहन पूछताछ कर रही है और सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की इस कार्रवाई से क्या सूरज की आंखों की रोशनी वापस आ पाएगी? क्या उसका परिवार इस गहरे सदमे से कभी उबर पाएगा?

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