पूर्णिया के बनमनखी में सगे भाइयों ने अंधविश्वास के नाम पर बड़े भाई सुशील शर्मा की पत्नी और 3 मासूम बच्चों के सामने धारदार हथियार से हत्या कर दी। पढ़ें कंचनक्रांति की यह विशेष भावुक और मार्मिक ग्राउंड रिपोर्ट।
कंचनक्रांति ब्यूरो, पूर्णिया।
रिश्तों का कत्ल जब अपनों के हाथों होता है, तो इंसानियत की रूह कांप उठती है। पूर्णिया के बनमनखी थाना क्षेत्र के मखनाहा हैरपुर गांव में शनिवार की काली रात एक ऐसा ही खौफनाक मंजर देखने को मिला। तीन मासूम बच्चों और एक बेबस पत्नी की आंखों के सामने उनके घर के इकलौते कमाऊ मुखिया, 35 वर्षीय सुशील शर्मा को उनके ही दो सगे भाइयों ने मौत के घाट उतार दिया। कल तक जिस आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहां सिर्फ चीखें, सिसकियां और कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा पसरा है।
दरवाजा बंद कर घोंटा गया अपनों का ही गला
मृतक की अभागी पत्नी कविता देवी ने रोते-बिलखते हुए जो दास्तान सुनाई, उसने सुनने वालों के कलेजे को छलनी कर दिया। कविता ने बताया कि शनिवार की रात करीब 10 बजे पूरा परिवार खाना खाकर बैठा ही था कि अचानक देवर बाबुल शर्मा और वकील शर्मा ने सुशील पर हमला कर दिया। कविता और उसके बच्चे कुछ समझ पाते, इससे पहले ही दोनों भाई सुशील को घसीटते हुए आंगन के भीतर ले गए।
दरिंदगी की हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने अंधविश्वास का ढोंग रचते हुए कहा कि "सुशील को भूत लग गया है।" इसके बाद उन्होंने आंगन का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। कविता बाहर खड़ी रोती रही, गिड़गिड़ाती रही, अपने सुहाग की भीख मांगती रही, लेकिन पत्थर दिल भाइयों का दिल नहीं पसीजा। उन्होंने सुशील के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि उसकी तड़प बाहर न आ सके और धारदार हथियार से उसकी निर्मम हत्या कर दी।
तमाशबीन बना रहा समाज, कोई बचाने नहीं आया
कविता ने भरे गले से समाज की बेरुखी पर भी सवाल उठाए। उसने बताया कि जब वह अपने सुहाग को बचाने के लिए दौड़ी, तो दरिंदों ने उस पर और बच्चों पर भी वार करने की कोशिश की। वह जान बचाकर बच्चों के साथ बाहर भागी। चीख-पुकार मचती रही, रात के सन्नाटे में कविता की आवाज गूंजती रही, लेकिन अफसोस! पड़ोस का कोई भी शख्स उस बेबस मां और उसके मासूमों की ढाल बनने आगे नहीं आया। हत्या की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद भी दोनों आरोपी लाश के पास ही बैठे रहे, जैसे उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा ही न हो।
12 साल बाद लौटा भाई, घर में लाया तबाही
इस खूनी खेल की पटकथा कुछ दिन पहले ही लिखी जाने लगी थी। कविता ने बताया कि उसका देवर वकील शर्मा पिछले 12 सालों से लापता था। बीते बुधवार को वह अचानक घर लौटा। उसके आने के बाद से ही दोनों छोटे भाई आपस में अजीब और गुप्त बातें किया करते थे। शनिवार की शाम को वे बाजार से एक धारदार हथियार खरीदकर लाए थे, जिसका इस्तेमाल उन्होंने इस खौफनाक वारदात के लिए किया।
बिखर गया मासूमों का आशियाना
सुशील शर्मा पेशे से किसान और मजदूर थे। दिनभर पसीना बहाकर वो जो कमाते थे, उसी से उनके घर का चूल्हा जलता था। करीब 10 साल पहले कविता और सुशील का विवाह हुआ था। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं— 8 साल का कृष्ण कुमार, 6 साल की लक्ष्मी कुमारी और महज 3 साल की मासूम शिवानी कुमारी। इन बच्चों को तो शायद यह भी नहीं पता कि अब उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है और बच्चे फटी आंखों से मां के आंसू पोंछने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही बनमनखी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बनमनखी थानाध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि दोनों नामजद आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। लेकिन कानून चाहे जो भी सजा दे, कविता का उजड़ा सुहाग और इन मासूमों के अनाथ बचपन की भरपाई कभी नहीं हो पाएगी।
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