रोहतास के नौहट्टा में झाड़-फूंक के चक्कर में 18 वर्षीय योगेंद्र उरांव की मौत के बाद बवाल। परिजनों ने पड़ोसी महिला पर लगाया डायन का आरोप, कहा- हत्या के बाद ही करेंगे अंतिम संस्कार। पुलिस बल तैनात।
कंचनक्रांति ब्यूरो, सासाराम।
21वीं सदी के दावों और आधुनिकता के शोर के बीच अंधविश्वास का जो भयानक सच आज भी हमारी जड़ों को खोखला कर रहा है, उसकी एक बेहद डरावनी और दर्दनाक तस्वीर रोहतास के नौहट्टा से सामने आई है। यहाँ सिर्फ एक 18 साल के मासूम योगेंद्र उरांव की जान ही नहीं गई, बल्कि इस मौत के बाद उपजे 'डायन' और 'जादू-टोने' के खौफ ने पूरे गाँव को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। जवान बेटे को खो चुके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, और उनका गुस्सा अब एक ऐसी आग का रूप ले चुका है जो किसी और की जिंदगी को भी स्वाहा कर सकती थी।
कड़कती धूप, मुहर्रम का जुलूस और फिर थम गईं सांसेंकमालखैरवा गाँव के रामनाथ उरांव का लाडला बेटा योगेंद्र (18 वर्ष) शुक्रवार को दिनभर कड़कती धूप और भीषण गर्मी में मजदूरी कर रहा था। थकान के बावजूद वह शाम को भदारा गाँव में मुहर्रम का जुलूस देखने चला गया। वहां से लौटने के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। अगर समय रहते उसे कोई अच्छा डॉक्टर मिल जाता तो शायद योगेंद्र आज अपने माता-पिता के सामने हंस रहा होता। लेकिन, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान पर अंधविश्वास की काली छाया भारी पड़ गई।
झाड़-फूंक के फेर में उजड़ गई माँ की गोद
परिजनों ने बीमारी को 'ऊपरी हवा' और 'भूत-प्रेत' का साया समझ लिया। वे तड़पते हुए योगेंद्र को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने के लिए ओझा-गुनियों के चक्कर काटते रहे। जब स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, तब जाकर वे उसे शाहपुर के एक आयुर्वेद डॉक्टर और फिर वहां से सासाराम सदर अस्पताल के लिए निकले। लेकिन बहुत देर हो चुकी थी; रास्ते में ही योगेंद्र ने दम तोड़ दिया। जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। माँ का विलाप सुन पूरा गाँव काँप उठ'पहले हत्या, फिर कफ़न'... बदले की आग में सुलग उठा परिवारशनिवार सुबह जब योगेंद्र की लाश गाँव पहुँची, तो गम का माहौल अचानक भयानक आक्रोश में बदल गया। बदहवास परिजनों ने पड़ोस की ही एक बेकसूर महिला पर 'डायन' होने और जादू-टोना कर योगेंद्र को मारने का आरोप मढ़ दिया। गुस्सा इस कदर चरम पर था कि परिजनों ने एलान कर दिया— "पहले उस महिला की हत्या करेंगे, उसके बाद ही बेटे का अंतिम संस्कार होगा।"
पहाड़ों तक हुआ पीछा,सहम गई मानवता
अपनी जान पर खतरा मंडराता देख वह बेबस महिला अपने पति के साथ गाँव छोड़कर भाग खड़ी हुई। आक्रोशित ग्रामीण हाथों में लाठी-डंडे लिए उसकी तलाश में दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित बभनतलाव गाँव तक पहुँच गए। गनीमत रही कि महिला उनके हाथ नहीं लगी, वरना एक और बेकसूर की बलि तय थी। रविवार शाम तक बेटे की लाश घर में ही पड़ी रही, लेकिन उसे मुखाग्नि नहीं नसीब हो समौके पर डटी पुलिस, टाली गई बड़ी अनहोनीगाँव में तनाव और ऑन-स्पॉट लिंचिंग की आशंका की खबर मिलते ही नौहट्टा थानाध्यक्ष दिवाकर कुमार और एसआई अमित कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। उनके साथ जिला परिषद सदस्य सुदामा राम और कई गणमान्य लोग भी कमालखैरवा पहुँचे। पुलिस और स्थानीय नेताओं ने गुस्साए परिवार को ढांढस बंधाया और कानून हाथ में न लेने की सख्त हिदायत दी।
थानाध्यक्ष दिवाकर कुमार ने बताया कि गाँव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पुलिस लगातार कैम्प कर रही है। परिजनों को समझा-बुझाकर शव के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराने का प्रयास किया जा रहा है। कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
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