रांची के बिरसा मुंडा चिड़ियाघर में जानवरों के भोजन और इलाज पर संकट। रेंजर आनंद कुमार मामले में हाईकोर्ट द्वारा वन विभाग के फंड पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए झारखंड सरकार ने दायर की हस्तक्षेप याचिका। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कंचनक्रांति ब्यूरो, रांची।
झारखंड की राजधानी रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा चिड़ियाघर (ऑरमांझी) के शेरों सहित अन्य वन्यजीवों के भोजन, इलाज और रखरखाव पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। इस आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) दायर की है। वन विभाग ने अदालत से आग्रह किया है कि वह आगामी 10 जून 2026 को पारित अपने उस आदेश को वापस ले, जिसके तहत विभाग के योजना एवं गैर-योजना मद से पैसे निकालने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
क्या है पूरा मामला और क्यों लगा फंड पर लॉक?
यह पूरा विवाद 'रेंजर आनंद कुमार बनाम राज्य सरकार' मामले से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वन विभाग और उससे संबंधित प्राधिकारों के बैंक खातों से धन निकासी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि इस अदालती आदेश के बाद चिड़ियाघर, विभिन्न पार्कों और वन्यजीव अभयारण्यों (Wildlife Sanctuaries) का दैनिक संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो गया है। जानवरों के भोजन, पिंजरों की सफाई और बीमार जीवों के इलाज की व्यवस्था ठप होने के कगार पर पहुंच गई है।
सरकार की कोर्ट में दलील: रेंजर को हो चुका है पूरा भुगतान
वन विभाग ने हाईकोर्ट को सौंपे अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता रेंजर आनंद कुमार का विभाग पर कोई भी बकाया लंबित नहीं है। उन्हें जनवरी 2022 में ही $6.70$ लाख रुपये का पूरा भुगतान किया जा चुका है।
विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
वर्ष 2005 में रेंजर आनंद कुमार को विभागीय कार्रवाई के तहत 'निंदा की सजा' के साथ-साथ तीन वेतन वृद्धि (Increment) रोकने का दंड दिया गया था। इसकी आधिकारिक अधिसूचना 7 जनवरी 2005 को जारी हुई थी।
हालांकि, वेतन निर्धारण और सैलरी स्लिप जारी करने के लिए अधिकृत वित्त विभाग (Finance Department) को इस दंड की समय पर जानकारी नहीं मिल सकी।
जानकारी के अभाव में रेंजर की वेतन वृद्धि नहीं रुकी और उन्हें नियमित रूप से बढ़ा हुआ वेतन मिलता रहा। ऐसे में उन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय हानि नहीं हुई है।
सकारात्मक आदेश की उम्मीद
राज्य सरकार ने अदालत से वन्यजीवों के मौलिक अधिकारों और उनकी जीवन रक्षा का हवाला देते हुए इस रोक को तुरंत हटाने की अपील की है, ताकि बेजुबान जानवरों के चारे और इलाज के लिए राशि जारी की जा सके। इस राजनीतिक व प्रशासनिक हलचल पर अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।
