स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के गृह जिले जामताड़ा में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। JMM नेता जितेंद्र यादव को चाचा का हीमोडायलिसिस कैथेटर लगवाने के लिए देवघर के निजी अस्पताल जाना पड़ा।

चंदन कुमार ठाकुर, मधुपुर (देवघर)।

 झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल खोलती एक बेहद संवेदनशील खबर सामने आई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अपने ही गृह जिले जामताड़ा के सदर अस्पताल में मरीजों को बुनियादी इलाज तक नसीब नहीं हो रहा है। आलम यह है कि आम जनता की बात तो दूर, सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता भी सरकारी अस्पतालों की बदहाली झेलने को मजबूर हैं।

करों प्रखंड के रहने वाले JMM के वरिष्ठ नेता जितेंद्र प्रसाद यादव अपने बुजुर्ग चाचा के इलाज के लिए जामताड़ा सदर अस्पताल से लेकर देवघर सदर अस्पताल तक भटकते रहे। उनके चाचा को आपात स्थिति में हीमोडायलिसिस कैथेटर (Hemodialysis Catheter) लगवाने की तत्काल जरूरत थी। दोनों प्रमुख सरकारी अस्पतालों में लचर व्यवस्था के कारण जब इलाज संभव न हो सका, तो अंततः उन्हें मजबूरी में देवघर के एक निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

 सरकारी तंत्र की इस लाचारी को JMM नेता ने खुद सोशल मीडिया पर उजागर किया है। व्हीलचेयर पर बैठे अपने बुजुर्ग चाचा की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर गहरा दुख जताया।

यह वाकया इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जितेंद्र यादव जिस क्षेत्र (मधुपुर/करों) से आते हैं, वहां का प्रतिनिधित्व राज्य के कैबिनेट मंत्री हफीजुल हसन करते हैं। ऐसे में जब सत्ताधारी दल के नेताओं को ही अपनों की जान बचाने के लिए निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है, तो आम गरीब जनता के हालात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

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