मोतिहारी में पाकिस्तानी साइबर अपराधियों से कथित संपर्क रखने वाले दो आरोपित गिरफ्तार। पुलिस जांच में बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम के लेनदेन का खुलासा हुआ है।

कंचन क्रांति न्यूज, मोतिहारी।

बिहार के मोतिहारी में साइबर ठगी के एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके तार पाकिस्तान में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े होने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय साइबर ठग कथित तौर पर भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड हासिल करते थे। इसके बाद इन खातों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी। साइबर ठगी से हासिल रकम इन्हीं बैंक खातों में जमा कराई जाती थी और फिर कमीशन काटकर क्यूआर कोड, फोन-पे समेत अन्य डिजिटल माध्यमों से आगे भेज दी जाती थी। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान संग्रामपुर थाना क्षेत्र के श्यामपुर बरवां गांव निवासी राजू कुशवाहा उर्फ राजू कुमार भगत और डुमरियाघाट थाना क्षेत्र के सेमुआपुर गांव निवासी पंकज गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से दो मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य सामान बरामद किए हैं।

सदर डीएसपी दिलीप कुमार ने शनिवार को बताया कि दोनों आरोपित मोतिहारी शहर के बलीसराय मोहल्ले में किराये के मकान में रह रहे थे। शुक्रवार को गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में इनके पाकिस्तान में बैठे साइबर अपराधियों के संपर्क में रहने और उनके निर्देश पर ठगी की रकम का लेनदेन करने की जानकारी सामने आई है।

गांव के लोगों को लालच देकर हासिल करते थे बैंक खाते

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपित ग्रामीण इलाकों के भोले-भाले लोगों को रुपये का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और बैंकिंग से जुड़ी जानकारियां हासिल करते थे। इसके बाद ये जानकारियां पाकिस्तान में बैठे साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद राजू और पंकज अपना कमीशन काटकर शेष राशि क्यूआर कोड, फोन-पे और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों से अलग-अलग खातों में भेज देते थे।

इस तरह स्थानीय स्तर पर बैंक खातों की व्यवस्था करने से लेकर ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित करने तक की भूमिका निभाई जा रही थी। पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों में भी किया जा सकता है। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि के लिए जांच जारी है।

मोबाइल की जांच में पाकिस्तानी नंबरों से संपर्क के संकेत

एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर इस पूरे मामले में विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया। सदर डीएसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच में पाकिस्तान के लोगों के व्हाट्सएप नंबरों से संपर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े संकेत मिले हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जो पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगालेगा। मामले की निगरानी इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी द्वारा लगातार की जा रही है।

पुलिस दोनों गिरफ्तार आरोपितों से आगे भी पूछताछ करेगी। जांच में अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी शामिल किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं, कितने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किया गया है और पाकिस्तान में बैठे कथित साइबर अपराधियों से इनके संपर्क कितने पुराने हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आने की संभावना है।

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