गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री ईश्वर सिंह की आपबीती


रात के तीन बजे सड़क पर बंद हुई बाइक, सुबह टंकी खुली तो हैरान रह गए लोग; डेढ़ साल में कई बार निकल चुका है पानी, अब सवाल ईंधन की गुणवत्ता और उपभोक्ता की सुरक्षा का


मैं पेट्रोल खरीदता हूं, वह भी सामान्य नहीं, प्रीमियम। हर लीटर पर ज्यादा पैसे देता हूं। स्वाभाविक है कि इसके बदले कम से कम इतना भरोसा तो होना चाहिए कि बाइक की टंकी तक पहुंचने वाला ईंधन तय गुणवत्ता का होगा।

लेकिन मेरी बाइक की टंकी से जब करीब ढाई लीटर पानी निकला तो मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल यही था—आखिर यह पानी आया कहां से?


मैं बिना जांच किसी पेट्रोल पंप या कंपनी पर आरोप नहीं लगा रहा। यह तय करना संबंधित विभाग और तकनीकी विशेषज्ञों का काम है कि पानी का स्रोत क्या है। लेकिन एक उपभोक्ता के रूप में सवाल पूछना मेरा अधिकार है, खासकर तब जब ऐसी समस्या मेरे साथ पहली बार नहीं हुई है।


भोर के तीन बजे अचानक बंद हुई बाइक

ऑफिस से घर लौट रहा था। भोर के करीब तीन बजे सिंघड़िया चौराहे के पास मेरी पल्सर बाइक चलते-चलते अचानक बंद हो गई।

सेल्फ काम नहीं कर रहा था। मैंने फ्यूल चोक में लिया। मेन से रिजर्व मोड किया। लगातार किक मारी। फ्यूज निकालकर साफ किया। अपनी जानकारी के मुताबिक जो संभव था, सब आजमाया।

बाइक नहीं चली।

इसी मशक्कत में करीब चार बज गए। टहलने निकले दो बच्चों ने मुझे परेशान देखा तो वे भी मदद के लिए आ गए। उन्होंने भी कोशिश की, लेकिन बाइक स्टार्ट नहीं हुई।

आखिर में मुझे बाइक को करीब एक किलोमीटर तक धक्का देना पड़ा।


कई वर्षों से ठीक से एक्सरसाइज नहीं कर पाया था। उस रात बाइक ने कसर पूरी करा दी। लगातार किक मारने और फिर एक किलोमीटर बाइक धकेलने के बाद शर्ट-पैंट से लेकर पूरा शरीर पसीने से ऐसा भीगा था, मानो नदी में डुबकी लगाकर निकला हूं।

किसी तरह घर पहुंचा। सुबह करीब पांच बजे सोया। परेशानी और झुंझलाहट में डोनाल्ड ट्रम्प तक को कोसता रहा। उनसे इस घटना का कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन आदमी का गुस्सा कभी-कभी भूगोल नहीं देखता।

सुबह मिस्त्री आया और कहानी बदल गई

दोपहर तक सोने की आदत है, लेकिन बाइक ठीक करानी थी, इसलिए जल्दी उठ गया। मिस्त्री को बुलाया और रात की पूरी कहानी बताई।

उसने जांच की और कहा कि टंकी में पेट्रोल के साथ काफी पानी है। इसके बाद टंकी से पानी निकालना शुरू हुआ।

पहले करीब सवा लीटर पानी निकला। इसके बाद बाइक स्टार्ट हुई। किसी तरह उसे लेकर सिंघड़िया स्थित मिस्त्री की दुकान तक पहुंचा।

वहां टंकी को खोलकर पूरी तरह पलटा गया।

और फिर करीब सवा लीटर पानी निकला।

यानी कुल मिलाकर बाइक की टंकी से करीब ढाई लीटर पानी बाहर आया।

मैं देखता रह गया। आसपास मौजूद लोग भी हैरान थे।

पिक्चर अभी बाकी थी...

टंकी साफ हो चुकी थी, लेकिन इसके साथ पेट्रोल भी खत्म हो गया था। अब बाइक में ईंधन भरवाना था। सबसे नजदीकी पेट्रोल पंप मिस्त्री की दुकान से करीब एक किलोमीटर दूर एम्स थाने के सामने था।

मैंने कहा कि किसी बोतल में पेट्रोल ले आते हैं। पता चला कि पंप से बोतल में पेट्रोल नहीं मिलेगा।

फिर क्या था!

बाइक को दोबारा धक्का देने की बारी आ गई।

मिस्त्री की दुकान पर काम सीख रहे एक युवक की मदद से बाइक को धकेलते हुए पेट्रोल पंप तक पहुंचाया। वहां पेट्रोल भरवाया।

इस तरह बाइक ने वर्षों से छूटी मेरी एक्सरसाइज का कोटा एक ही दिन में काफी हद तक पूरा करा दिया।

हंसी के पीछे गंभीर सवाल

टंकी से निकले पानी को देखकर वहां मौजूद कई लोगों ने वीडियो बनाया, तस्वीरें खींचीं। मेरे मुंह से 'फुलझड़ियां' निकल रही थीं और मेरी हालत देखकर बाकी लोगों के चेहरों पर भी अलग ही चमक थी।

घटना को मजाक में सुनाया जा सकता है। मैंने भी सुनाया।

लेकिन असली कहानी मजाक की नहीं है।

यह उपभोक्ता के भरोसे और उसकी सुरक्षा का सवाल है।

चलती बाइक में अचानक इंजन बंद हो जाना केवल असुविधा नहीं है। कल्पना कीजिए कि यही घटना किसी हाईवे पर तेज रफ्तार में होती। पीछे कोई भारी वाहन होता। बाइक ओवरटेक कर रही होती या किसी व्यस्त चौराहे के बीच अचानक बंद हो जाती।

तब क्या होता?

सबसे बड़ी बात—यह पहली बार नहीं हुआ

मेरी चिंता की असली वजह यही है।

पिछले करीब डेढ़ साल में बाइक की टंकी से चार-पांच बार पानी निकल चुका है। कभी एक लीटर तो कभी करीब डेढ़ लीटर।

बार-बार समस्या आने के बाद मैंने सोचा कि सामान्य पेट्रोल के बजाय प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल किया जाए।

करीब 100 रुपये प्रति लीटर वाले पेट्रोल के बदले 110-111 रुपये के आसपास कीमत वाला प्रीमियम पेट्रोल भरवाना शुरू किया।

सोचा—दाम ज्यादा है तो गुणवत्ता भी बेहतर मिलेगी।

लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई।

और इस बार मात्रा करीब ढाई लीटर तक पहुंच गई।

अब सवालों के जवाब कौन देगा?

मैं फिर स्पष्ट कर दूं कि बिना वैज्ञानिक या तकनीकी जांच के मैं यह दावा नहीं कर रहा कि पानी किसी पेट्रोल पंप से ही बाइक की टंकी में पहुंचा।

लेकिन यदि किसी वाहन की टंकी से बार-बार इतनी मात्रा में पानी निकल रहा है तो इसकी जांच जरूरी नहीं है क्या?

क्या बाइक की टंकी में किसी तकनीकी खामी के कारण पानी प्रवेश कर रहा है?

क्या बारिश या नमी के कारण ऐसा संभव है?

यदि संभव है तो इतनी बड़ी मात्रा में कैसे?

क्या पेट्रोल पंपों के भूमिगत टैंकों में पानी की नियमित जांच होती है?

यदि होती है तो उसका रिकॉर्ड कौन रखता है?

पेट्रोल पंप पर ईंधन की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर ग्राहक तत्काल किस अधिकारी से शिकायत करे?

क्या ग्राहक के सामने पेट्रोल की गुणवत्ता जांचने की कोई व्यवस्था है?

और यदि खराब या दूषित ईंधन से वाहन का इंजन खराब हो जाए तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

बात मेरी बाइक भर की नहीं है

मेरी बाइक ठीक हो जाएगी। कुछ रुपये लगेंगे। मिस्त्री मेहनताना लेगा। मैं फिर पेट्रोल भरवाऊंगा और सड़क पर निकल जाऊंगा।

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए।

क्योंकि सवाल मेरी एक बाइक का नहीं है।

सवाल उस उपभोक्ता का है जो पेट्रोल पंप पर लगी मशीन में दिखाई दे रही रकम का पूरा भुगतान करता है और बदले में भरोसा करता है कि उसे निर्धारित मात्रा के साथ निर्धारित गुणवत्ता का ईंधन मिल रहा है।

हम पेट्रोल खरीदते समय हर लीटर की कीमत चुकाते हैं।

फिर सवाल पूछने का अधिकार भी पूरा होना चाहिए।

मेरी टंकी से करीब ढाई लीटर पानी निकला है। वीडियो है, तस्वीरें हैं और इसे अपनी आंखों से देखने वाले लोग भी हैं।

अब मैं सिर्फ इतना जानना चाहता हूं—

यह पानी आया कहां से?

इस सवाल का जवाब मिलना चाहिए।

क्योंकि अगली बार किसी की बाइक सिर्फ बंद हो, यह जरूरी नहीं। किसी की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।

और हां...जवाब मिलने तक मुंह से 'फुलझड़ियां' निकलती रहेंगी।