पटना जू में वन्यप्राणी सप्ताह की शुरुआत हो गई है। जू निदेशक हेमंत पाटिल और विशेषज्ञों ने सांपों के रेस्क्यू, डॉल्फिन संरक्षण और जैव विविधता को लेकर अहम जानकारियां साझा कीं। जानिए 8 अक्टूबर तक के कार्यक्रमों की पूरी डिटेल।

अवध कुमार, पटना।

सांप दिखते ही घबराने या उन्हें मारने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तुरंत वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना दें। वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्रति जन-जागृत बढ़ाने के उद्देश्य से राजधानी के पटना जू (संजय गांधी जैविक उद्यान) में 'वन्यप्राणी सप्ताह' का भव्य शुभारंभ किया गया है। 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस विशेष सप्ताह के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग वन्यजीवों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, जागरूकता कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, वन्यजीव विशेषज्ञों, इंटर्न्स, वॉलंटियर्स और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया।

पारिस्थितिकी तंत्र में हर जीव महत्वपूर्ण: जू निदेशक हेमंत पाटिल

समारोह को संबोधित करते हुए जू निदेशक हेमंत पाटिल ने कहा कि वन्यप्राणी सप्ताह केवल वन्यजीवों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके बारे में गहराई से जानने और उनके संरक्षण में अपनी व्यक्तिगत भूमिका को समझने का समय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रकृति के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में छोटे से छोटा जीव भी अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिहार में कुल वन क्षेत्र सीमित होने के बावजूद जैव विविधता और वन्यजीवों की दृष्टि से यह राज्य बेहद समृद्ध है। ऐसे में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बेहतर तालमेल व सह-अस्तित्व के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।

सांपों की पहचान और सुरक्षित हैंडलिंग का हुआ लाइव डेमो

कार्यक्रम के पहले विशेष तकनीकी सत्र में हर्पेटोलॉजिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञ अभिषेक ने प्रतिभागियों को सांपों की सही पहचान, विषैले, गैर-विषैले और हल्के विषैले सांपों के बीच का अंतर बारीकी से समझाया। इस दौरान सांपों की सुरक्षित हैंडलिंग और उनके रेस्क्यू का लाइव डेमो भी दिखाया गया, जिसे बच्चों ने बहुत ध्यान से देखा। सत्र में बिहार में पाई जाने वाली विभिन्न सांप प्रजातियों के अलावा मगरमच्छों की प्रजातियों तथा बाढ़ के दिनों में सांपों व मगरमच्छों के रिहायशी इलाकों तक पहुँचने की स्थिति में बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

विशेषज्ञ अभिषेक ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर उसे खुद पकड़ने या मारने की कोशिश बिल्कुल न करें। सुरक्षित दूरी से उसकी तस्वीर लेकर वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम समय पर पहुंचकर उसे सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास तक पहुँचा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश सांप तब तक किसी पर हमला नहीं करते, जब तक उन्हें छेड़ा न जाए या उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो।

इस मौके पर हर दिन अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। कल हाथियों के साथ-साथ कछुओं (टर्टल, टॉर्टॉयज और टेरापिन्स) पर विशेष सत्र का आयोजन होगा। 5 अक्टूबर को गंगेटिक डॉल्फिन (गंगा डॉल्फिन) के संरक्षण पर विशेष व्याख्यान। 6 अक्टूबर को बिहार जैव विविधता बोर्ड की ओर से स्कूली व कॉलेज विद्यार्थियों के लिए वन्यजीव क्विज प्रतियोगिता होगी। 7 अक्टूबर को पक्षी संरक्षण (Bird Conservation) पर विशेषज्ञ व्याख्यान होगा और अंतिम दिन 8 अक्टूबर को विभिन्न गतिविधियों के जरिए वन्यजीवों के महत्व का संदेश देने के बाद वन्यप्राणी सप्ताह का समापन समारोह आयोजित होंगे।

कार्यक्रम के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंद सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार, विशेष सचिव आलोक कुमार, सीसीएफ (आईटी) अमित कुमार और सीसीएफ वन्यप्राणी अंचल सत्यजीत कुमार समेत कई अन्य वन अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ मौजूद रहे। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले पटना जू के समर्पित वनकर्मियों को सम्मानित भी किया गया।

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