गोरखपुर के एक ओला चालक की चिंता और E20 पर बढ़ती बहस


आनंद सिंह की गोरखपुर से रिपोर्ट

बीते बुधवार को मैं अपने ईश्वर पुत्र प्रियंक के साथ डॉक्टर के पास जा रहा था। हमने ओला कैब बुक की। स्विफ्ट डिजायर आई। OTP बताया और गाड़ी चल पड़ी।


रास्ते में मैंने ड्राइवर से यूं ही पूछ लिया, "गोरखपुर में E20 पेट्रोल आ गया है क्या?"

उसने तुरंत जवाब दिया, "नहीं, अभी नहीं आया है। लेकिन बहुत जल्दी आने वाला है।"

इतना कहते ही उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई देने लगी। बिना किसी और सवाल के वह खुद बोलने लगा।


"हमलोग रोज फेसबुक और यूट्यूब देख रहे हैं। ई गडकरिया हमलोगों को बर्बाद कर देगा। हमारे दोस्त बता रहे थे कि E20 इस्तेमाल करने से इंजन का हेड खराब हो जा रहा है। अभी तो गोरखपुर में E20 नहीं आया है। जब आ जाएगा तब हमलोग क्या करेंगे?"


उसने अपनी गाड़ी की तरफ इशारा करते हुए कहा, "मेरी गाड़ी BS4 है। इसमें E20 सक्सेस नहीं है। BS6 में ही E20 सक्सेस है। पेट्रोल का दाम पहले ही बहुत ज्यादा है। अगर शुद्ध पेट्रोल लेना पड़ा तो करीब 175 रुपये लीटर पड़ेगा। और E20 भरवाएंगे तो डर है कि कहीं गाड़ी ही खराब न हो जाए। समझ में नहीं आ रहा कि करें क्या।"


मैंने सहज भाव से कहा, "तो इसे बेचकर BS6 वाली नई गाड़ी ले लो।"


वह हल्का-सा हंस पड़ा। फिर बोला, "आप भी मजाक करते हैं अंकल। अभी इसी गाड़ी की किश्त पूरी नहीं हुई है। दो साल और EMI भरनी है। कहां से नई BS6 गाड़ी खरीदेंगे?"

इसके बाद उसने गुस्से और बेबसी में भोजपुरी में कहा—

"ई गडकरी हमनी के भेंटा जाय त पूछीं ओकरा से कि साले काहे ई सब करत ह।"

इतने में डॉक्टर का क्लिनिक आ गया। मैंने 161 रुपये का किराया दिया और उतर गया। लेकिन उस ड्राइवर की चिंता रास्ते भर मेरे साथ रही।


दरअसल, यह सिर्फ एक ओला चालक की परेशानी नहीं है। पिछले कुछ महीनों से देशभर में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर हजारों वीडियो घूम रहे हैं। कहीं दावा किया जा रहा है कि पुराने इंजन पर इसका असर पड़ेगा, कहीं कहा जा रहा है कि इंजन जल्दी खराब हो जाएगा। दूसरी ओर सरकार और वाहन निर्माता कंपनियां लगातार कह रही हैं कि E20 से प्रदूषण कम होगा, विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी और किसानों को भी फायदा मिलेगा।


असल विवाद उन लाखों लोगों को लेकर है जिनके पास अभी भी BS4 या उससे पुराने वाहन हैं। ऐसे वाहन मालिकों के मन में सवाल है कि अगर भविष्य में सामान्य पेट्रोल की उपलब्धता कम हो गई या उसकी कीमत ज्यादा हो गई तो वे क्या करेंगे? नई गाड़ी खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है, खासकर टैक्सी, ऑटो और निजी वाहन चलाकर परिवार पालने वाले लोगों के लिए।


सरकार की दलीलें अपनी जगह हैं और तकनीकी विशेषज्ञों की राय भी सामने आ रही है। लेकिन सड़क पर रोज गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर की चिंता भी कम वास्तविक नहीं है। गोरखपुर की उस ओला कैब में बैठकर महसूस हुआ कि E20 की बहस अब सिर्फ नीति या तकनीक का विषय नहीं रह गई है, बल्कि आम आदमी की रोजी-रोटी और जेब से जुड़ा सवाल बन चुकी है।