वासेपुर में गैंगस्टर फहीम खान के घर 2004 में एके-47 से हुए हमले मामले में कोर्ट ने 22 साल 8 महीने बाद फैसला सुनाया है। मुख्य दुश्मन साबिर आलम के भाई समेत तीन लोगों को दोषी करार दिया गया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट
धनबाद। सिनेमाई पर्दे पर आपने गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म में गोलियों की तड़तड़ाहट और गैंगवार के खौफनाक मंजर तो खूब देखे होंगे, लेकिन यह कहानी पर्दे की नहीं, बल्कि हकीकत की है। झारखंड के धनबाद स्थित बहुचर्चित वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान के घर पर साल 2004 में एके-47 से हुए सनसनीखेज हमले के मामले में अदालत ने 22 साल और 8 महीने के लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला व सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है।
अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे फहीम खान के जानी दुश्मन साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, वासेपुर निवासी शहादत हुसैन और पटना के शूटर तनवीर आलम को दोषी करार दिया है। कोर्ट का यह फैसला आते ही तीनों दोषियों को फौरन न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। अदालत ने सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर की तिथि मुकर्रर की है, जिस दिन दोषियों की सजा का ऐलान किया जाएगा। बता दें कि तनवीर की गैर-हाजिरी के कारण 23 सितंबर को आने वाला फैसला टल गया था, जिसके बाद सोमवार को सभी आरोपी अदालत में उपस्थित हुए।
इस चर्चित घटना की गूंज सिर्फ धनबाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि बॉलीवुड तक पहुंची। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर पार्ट 2' में वासेपुर के इस रीयल सीन और फहीम खान के घर पर हुए इस दुस्साहसिक हमले को फिल्माया गया था। फैसले के दिन कोर्ट परिसर पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील रहा, जहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात थे।
घटना 29 जनवरी 2004 की है, जब वासेपुर कमर मखदुमी रोड स्थित फहीम खान के घर पर एके-47 से ताबड़तोड़ अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। फहीम के अधिवक्ता शाहबाज सलाम ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि हमले के वक्त फहीम खान ने अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी की छत पर छलांग लगा दी थी, जिससे उनका पैर टूट गया था। इस भीषण गोलीबारी में फहीम के बॉडीगार्ड और बिहार के अरवल निवासी विनोद शर्मा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि फहीम का नौकर शाहिद भी गोली लगने से घायल हो गया था।
वारदात को अंजाम देने के बाद भाग रहे अपराधियों की मारुति वैन और बोलेरो का पीछा पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी ने किया था। पॉलीटेक्निक कॉलेज के पास पुलिस और शूटरों के बीच हुई मुठभेड़ में पटना के शूटर सुल्तान को ढेर कर दिया गया था। इसके अलावा पुलिस ने पटना के शूटर तबरेज उर्फ तब्बू व तनवीर तथा मुंगेर के अशफाक को धर दबोचा था। अपराधियों के पास से एके-47 राइफल की तीन मैगजीन, 12 जिंदा कारतूस, दो रिवाल्वर और 9 एमएम की मैगजीन समेत भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे।
फहीम खान के फर्द बयान पर बैंक मोड़ थाने में कांड के कथित मास्टरमाइंड साबिर आलम, उसके भाई वाहिद आलम व शाहिद आलम, तीनों के पिता शाकिर आलम, शाहिद मुन्ना, मुन्ना मियां उर्फ एकराम, अफाक आलम, रमेश, पप्पू अगरबत्तीवाला, असगर आलम, साकेब अफजल, तनवीर, तबरेज और अशफाक आलम समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने गहन अनुसंधान के बाद 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
लंबी चली इस कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल के दौरान कई आरोपी इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। ट्रायल के दौरान ही साबिर के पिता शाकिर आलम की मौत हो गई थी। वहीं, 21 सितंबर 2018 को पटना में तबरेज की भी बाइक सवार दो शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इससे पहले 18 दिसंबर 2009 को रांची के हटिया स्टेशन के पास साबिर के दूसरे भाई वाहिद की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं साबिर आलम, जावेद आलम उर्फ बाबू, साकेत अफजल और मुन्ना समेत अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ अलग से ट्रायल की कार्रवाई चल रही है। मामले में अनुसंधानकर्ता के अलावा सूचक फहीम खान, उसके भाई नसीम खान उर्फ सानू, ममेरा भाई शेर खान और शाहिद समेत कुल 18 गवाहों की गवाही दर्ज की गई थी। अब सबकी निगाहें 3 अक्टूबर पर टिकी हैं जब अदालत दोषियों की सजा का ऐलान करेगी।
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