चंडीगढ़ पुलिस के ऑपरेशन सेल ने स्वतंत्रता दिवस से पहले सीमा पार से ड्रोन के जरिए आई जिगाना व PF-3 पिस्टल के साथ दीपक नंदल गैंग के 3 शार्पशूटर्स को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी गुरुग्राम में रंगदारी के लिए फायरिंग करने की फिराक में थे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।


चंडीगढ़ | 15 अगस्त से ठीक पहले चंडीगढ़ पुलिस के ऑपरेशन सेल ने शहर में एक बड़े सुरक्षा खतरे को टालते हुए हथियार तस्करों और गैंगस्टरों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की टीम ने स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष चेकिंग अभियान के दौरान हरियाणा के तीन शातिर बदमाशों को अत्याधुनिक हथियारों के जखीरे के साथ गिरफ्तार किया है।


प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि पकड़े गए आरोपी कुख्यात दीपक नंदल गैंग के सक्रिय सदस्य हैं और उनके पास बरामद हथियार सीमा पार यानी पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भारत की सीमा में गिराए गए थे। इन हथियारों का इस्तेमाल गुरुग्राम में एक कारोबारी से रंगदारी (Extortion) वसूलने और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग में किया जाना था।


बरामद हथियारों में 1 जिगाना (Zigana) पिस्टल, 2 पीएफ-3 (PF-3) पिस्टल, 2 मैगजीन और 19 जिंदा कारतूस शामिल हैं।

गिरफ्तार अपराधियों में अजय (19 वर्ष), रोहित (18 वर्ष) और देव (18 वर्ष), तीनों हरियाणा के जींद जिले के निवासी हैं।


15 अगस्त के सुरक्षा अलर्ट को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस का ऑपरेशन सेल शहर के संवेदनशील इलाकों में नाकाबंदी कर गहन चेकिंग कर रहा था। इसी दौरान संदिग्ध अवस्था में घूम रहे तीन युवकों अजय, रोहित और देव को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए, जब उनके कब्जे से विदेशी जिगाना पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस मिले।


कड़ाई से पूछताछ करने पर तीनों ने कबूला कि वे दीपक नंदल गैंग के इशारे पर काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार अजय (उम्र 19 वर्ष): हरियाणा के जींद में मारुति कंपनी में हेल्पर का काम करता था। वही रोहित और देव को गैंग के संपर्क में लाया था। रोहित (उम्र 18 वर्ष) जींद में एक बिजली की दुकान पर काम करता था। देव (उम्र 18 वर्ष) दुकान पर हेल्पर का काम करता था।


पुलिस का कहना है कि गैंग के बड़े आकाओं ने इन कम उम्र लड़कों को मोटी रकम और रातों-रात अमीर बनने का लालच देकर अपने दलदल में फंसाया था।


जांच अधिकारियों के मुताबिक, गैंग ने इन युवकों को warenders देने से पहले पूरी योजना तैयार कर रखी थी। आरोपियों को पहले ही गुरुग्राम भेजा गया था, जहां उन्होंने एक विशिष्ट टारगेट के ठिकाने की रेकी (सुरक्षा व गतिविधियों का जायजा) की थी।


योजना के तहत, पाकिस्तान से मंगाए गए इन घातक हथियारों से गुरुग्राम में उस टारगेट के घर या दफ्तर पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दहशत फैलानी थी, ताकि उससे मोटी रंगदारी वसूली जा सके। हालांकि, चंडीगढ़ पुलिस की मुस्तैदी से यह वारदात समय रहते टल गई।


ऑपरेशन सेल की पड़ताल में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से जुड़े हथियार सप्लाई के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की परतें भी उधड़ गई हैं। अमृतसर के सीमावर्ती गांव कक्कड़ का रहने वाला 32 वर्षीय निशान सिंह इस नेटवर्क का मुख्य भारतीय हैंडलर निकला।

निशान सिंह गांव में डेयरी चलाने का काम करता है, लेकिन इस धंधे की आड़ में वह पाकिस्तान में बैठे हथियार तस्करों और आईएसआई (ISI) समर्थित एजेंटों के सीधे संपर्क में था।

पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में गिराई जाने वाली हथियारों व कारतूसों की खेप को निशान सिंह खुद रिसीव करता था और फिर गैंग के गुर्गों तक सुरक्षित पहुंचाता था।


चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता ने स्वतंत्रता दिवस पर संभावित आतंकी या गैंगवार की बड़ी घटना को टाल दिया है। अब जांच का दायरा निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है:

गुरुग्राम का टारगेट कौन? पुलिस उस कारोबारी/व्यक्ति की सुरक्षा बढ़ा रही है जिसकी रेकी की गई थी।

सीमा पार बैठे उन आकाओं की धरपकड़ के लिए केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है जो ड्रोन से खेप भेज रहे थे।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के जरिए जांच की जा रही है कि क्या बरामद जिगाना या पीएफ-3 पिस्टल से पहले भी पंजाब या हरियाणा में कोई क्राइम हुआ है।

दीपक नंदल गैंग के फंडिंग और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए छापेमारी जारी है।