पत्रकार धनंजय शुक्ला ने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर वरिष्ठ पत्रकार धनंजय शुक्ला ने तीखी टिप्पणी की है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी विस्तृत टिप्पणी में उन्होंने शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं, प्रशासनिक जवाबदेही और विकास के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
धनंजय शुक्ला ने लिखा कि गोरखपुर आज ऐसे शहर के रूप में दिखाई दे रहा है, जहां एक ओर मुख्यमंत्री का नियमित दौरा होता है और विकास कार्यों की लगातार समीक्षा की जाती है, वहीं दूसरी ओर हल्की बारिश में जलभराव, अपराध की बढ़ती घटनाएं और कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही है।
उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रदेश भर में अपराध पर सख्ती और बुलडोजर कार्रवाई की चर्चा होती है, लेकिन गोरखपुर में अपराधियों के हौसले बुलंद दिखाई देते हैं।
उन्होंने जेल सुरक्षा में सेंध लगाकर एक दुष्कर्म के आरोपी के फरार होने की घटना, महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों तथा शहर में सामने आई अन्य गंभीर घटनाओं का उल्लेख करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
पत्रकार ने यह भी कहा कि अपहरण, फिरौती और हत्या जैसी घटनाओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
उनके अनुसार, यदि मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही ऐसी परिस्थितियां बनी रहें तो आम लोगों का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
अपनी टिप्पणी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए धनंजय शुक्ला ने महाभारत के हस्तिनापुर का उदाहरण देते हुए लिखा कि जब अन्याय के सामने समाज और व्यवस्था मौन हो जाती है तो उसके दूरगामी परिणाम सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर की स्थिति देखकर उन्हें वही प्रसंग याद आता है, जहां सब कुछ देखते हुए भी समय पर हस्तक्षेप नहीं हुआ और अंततः महाभारत जैसी विनाशकारी स्थिति पैदा हुई।
उन्होंने अंत में सवाल उठाया कि आखिर गोरखपुर के नागरिक किसके भरोसे स्वयं को सुरक्षित मानें। उनका कहना है कि शहर के लोगों के मन में बढ़ती असुरक्षा और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, जिन पर संवेदनशीलता के साथ ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
धनंजय शुक्ला की इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने उनकी चिंताओं का समर्थन किया है, जबकि कुछ लोगों ने उनके आकलन पर असहमति भी जताई है। हालांकि, उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर गोरखपुर की कानून-व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।
