रायबरेली के डलमऊ थाने में जानलेवा हमले के शिकार पीड़ित से दरोगा ने एफआईआर दर्ज करने के एवज में मांगी 10 हजार की रिश्वत। रिश्वत न देने पर केस दर्ज करने से इनकार। पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार।

  1.  कुल्हाड़ी और लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर बुजुर्ग को किया मरणासन्न
  2. अस्पताल ने पुलिस केस बताकर लौटाया, थाने पहुंचे तो दरोगा ने रिश्वत न मिलने पर केस दर्ज करने से किया इनकार
  3. ·न्याय की गुहार लेकर एसपी दफ्तर पहुंचा पीड़ित परिवार, एसपी ने जांच और सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन


रायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के डलमऊ थाने से खाकी को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। दबंगों के जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल एक पीड़ित जब न्याय की आस में थाने पहुंचा, तो डलमऊ पुलिस ने मदद करने के बजाय उससे 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग ली। गरीब पीड़ित द्वारा असमर्थता जताने पर दरोगा ने न सिर्फ एफआईआर दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया, बल्कि शिकायत लेकर पहुंचे पीड़ित के बेटे को ही थाने में बैठा लिया। खाकी के इस रवैये और दबंगों की धमकियों से परेशान पीड़ित परिवार ने अब पुलिस अधीक्षक (एसपी) के समक्ष पेश होकर न्याय की गुहार लगाई है।


क्या है पूरा मामला?

डलमऊ थाना क्षेत्र के जहांगीराबाद गांव निवासी पीड़ित धर्मराज पुत्र मोहनलाल के मुताबिक, बीती 31 जुलाई 2026 की शाम करीब 7:30 बजे गांव के ही दबंग ब्रजेश कुमार पुत्र गंगाचरण और गंगाचरण पुत्र छोटू लामबंद होकर कुल्हाड़ी, लाठी-डंडे और फरसा लेकर उनके दरवाजे पर आ धमके। आरोपियों ने पीड़ित के घर के मुख्य द्वार पर बबूल की कांटेदार झाड़ियों व डालियों का ढेर लगा दिया।

जब धर्मराज ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने गाली-गलौज करते हुए उन पर जानलेवा हमला बोल दिया। इस दौरान आरोपी ब्रजेश ने धर्मराज के सिर पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ तीन वार किए, जिससे वह लहूलुहान होकर मौके पर ही मरणासन्न स्थिति में गिर पड़े।


इलाज के बजाय थाने के चक्कर, अस्पताल ने भी लौटाया

घटना के बाद पीड़ित का बेटा गया प्रसाद अपने पिता को गंभीर हालत में लेकर तत्काल डलमऊ के सरकारी अस्पताल पहुंचा। हालांकि, वहां तैनात डॉक्टरों ने मामले को 'फौजदारी केस' (मेडिको-लीगल) बताते हुए पहले थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने और पुलिस के साथ आने की बात कहकर इलाज करने से मना कर दिया।


दरोगा की हठधर्मिता: 10 हजार दो, तभी लिखी जाएगी एफआईआर

डॉक्टरों के कहने पर जब बेटा गया प्रसाद शिकायत दर्ज कराने डलमऊ थाने पहुंचा, तो वहां तैनात दरोगा ने हमदर्दी दिखाने के बजाय उल्टा उसे ही थाने में बैठा लिया। आरोप है कि दरोगा ने साफ शब्दों में कहा, 10 हजार रुपये दो, तभी केस दर्ज करूंगा। जब बेटे ने अत्यंत गरीब होने और पैसे न होने की बात कही, तो दरोगा ने एफआईआर दर्ज करने से स्पष्ट मना कर दिया और उन्हें भगा दिया।


दबंगों के हौसले बुलंद, परिवार दहशत में

पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से बेखौफ आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंग आए दिन उन्हें गालियां दे रहे हैं और जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं, जिससे पूरे परिवार का जीना दूभर हो गया है।

अंतिम रास्ता न देखकर पीड़ित धर्मराज ने एसपी कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक से आपबीती सुनाई और प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी रायबरेली ने पीड़ित को निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों व लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।

-   रविशंकर सिंह की रिपोर्ट

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